लजर मसीह : आतंकी के मददगार गुरुदासपुर के मेडिकल अफसर की हो रही तलाश, एसटीएफ भी गिरफ्तारी के लिए दे रह दबिश
आतंकी मसीह अमृतसर के थाना रामदास के कुरलिया गांव का रहने वाला है। गिरफ्तारी टीम में शामिल अफसर भी हैरान रह गए, जब उसके पास गाजियाबाद के पते का आधार कार्ड मिला। इसमें उसका पता हाउस नंबर बी-55, रामप्रस्थ कॉलाेनी, चंदर नगर जिला गाजियाबाद अंकित था। सख्ती से पूछताछ में उसने बताया कि यह आधार कार्ड उसने फर्जी पते पर बनवाया था।
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जेल भेजे जाने से पहले बीकेआई के आतंकी लजर मसीह से पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि पंजाब के गुरदासपुर का एक मेडिकल अफसर उसका मददगार है, जिसकी मदद से उसने गाजियाबाद में फर्जी पते पर आधार कार्ड बनवा लिया था और पासपोर्ट के लिए भी आवेदन किया था। फिलहाल यूपी एसटीएफ के साथ ही पंजाब पुलिस भी उसकी तलाश में जुटी है।
मसीह अमृतसर के थाना रामदास के कुरलिया गांव का रहने वाला है। गिरफ्तारी टीम में शामिल अफसर भी हैरान रह गए, जब उसके पास गाजियाबाद के पते का आधार कार्ड मिला। इसमें उसका पता हाउस नंबर बी-55, रामप्रस्थ कॉलाेनी, चंदर नगर जिला गाजियाबाद अंकित था। सख्ती से पूछताछ में उसने बताया कि यह आधार कार्ड उसने फर्जी पते पर बनवाया था।
यह भी स्वीकार किया कि गुरुदासपुर में रहने वाला एक मेडिकल अफसर उसका मददगार है। उसने ही उसे गाजियाबाद के पते का एक फर्जी प्रमाणपत्र जारी किया था। इसी प्रमाणपत्र के जरिए उसने अपने आधार कार्ड में अमृतसर की जगह गाजियाबाद का पता अंकित करा लिया। यह जानकारी सामने आने के बाद यूपी एसटीएफ के साथ ही पंजाब पुलिस भी मेडिकल अफसर की तलाश में जुट गई है। माना जा रहा है आरोपी मेडिकल अफसर से कई अन्य अहम सुराग हाथ लग सकते हैं।
फरारी में भी तो नहीं की मदद?
फर्जी पते पर आधार बनवाने में मददगार के तौर पर नाम सामने आने के बाद कई और सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह भी है कि आतंकी लजर के पंजाब पुलिस की हिरासत से फरार होने में भी तो मेडिकल अफसर ने मदद नहीं की? दरअसल, पंजाब में पिछले साल उसे हथियारों व ड्रग तस्करी के मामले में जेल भेजा गया था। जेल में गैंगवार में घायल होने के बाद वह अमृतसर स्थित गुरुनानक देव अस्पताल में भर्ती हुआ। इसके बाद 24 सितंबर 2024 को वह वहां से फरार हो गया। एसटीएफ व पंजाब पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि फरारी में भी उसका मददगार मेडिकल अफसर ही तो नहीं ?
फर्जी पते पर बने आधार पर लिया था सिम
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह बात भी सामने आई है कि फर्जी पते पर बने आधार के जरिए ही उसने एक सिम कार्ड भी खरीदा था। 16 दिसंबर 2024 को यह सिम कार्ड खरीदा गया, हालांकि शातिर आतंकी इस सिम का इस्तेमाल कॉलिंग के लिए नहीं करता था। केवल हॉटस्पॉट के लिए ही वह इसका इस्तेमाल करता था।