हाईकोर्ट : कानपुर के वकील हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटें, वृहद पीठ ने दिया आदेश, बार के अध्यक्ष व महासचिव तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के वकीलों को तत्काल हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का निर्देश दिया है। सात सदस्यों वाली वृहद पीठ ने कहा कि कोई भी वकील या बार एसोसिएशन का पदाधिकारी न्यायिक कार्य निष्पादन में अवरोध उत्पन्न करेगा तो उसे गंभीरता से लिया जायेगा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के वकीलों को तत्काल हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का निर्देश दिया है। सात सदस्यों वाली वृहद पीठ ने कहा कि कोई भी वकील या बार एसोसिएशन का पदाधिकारी न्यायिक कार्य निष्पादन में अवरोध उत्पन्न करेगा तो उसे गंभीरता से लिया जायेगा। कोर्ट ने कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी व महासचिव अनुराग श्रीवास्तव एवं लायर्स एसोसिएशन कानपुर नगर के अध्यक्ष रवींद्र शर्मा व महासचिव शरद कुमार शुक्ल को नोटिस जारी कर सात अप्रैल शुक्रवार को 10 बजे हाजिर होने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को नोटिस तामील कर इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही जिलाधिकारी व पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि बार के नोटिस बोर्ड व अदालत परिसर में नोटिस चस्पा कर आज बृहस्पतिवार को एक बजे तक रिपोर्ट भेजें। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष से भी शुक्रवार सात अप्रैल को 10 बजे कोर्ट में मौजूद रहने के लिए कहा है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी, न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र, न्यायमूर्ति डॉ. कौशल जयेंद्र ठाकर तथा न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की वृहद पीठ ने दिया है।
कानपुर के वकीलों ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट का बहिष्कार शुरू किया था, जो बाद में हड़ताल में तब्दील हो गया। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व प्रशासनिक न्यायाधीश ने प्रशासनिक स्तर पर बार एसोसिएशन से बात कर हल निकालने की कोशिश की। पदाधिकारियों ने आश्वासन भी दिया किंतु हड़ताल जारी रखी।
वायदे पर अमल नहीं किया और हड़ताल को पूरे जिले में फैलाने की धमकी दे रहे हैं। इस पर सात जजों की बृहद पीठ ने मामले की सुनवाई की। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व कैप्टन हरीश उप्पल व अन्य केसों के हवाले से कहा कि वकीलों की हड़ताल का समर्थन नहीं किया जा सकता। माना जाता है वकील काम करेंगे। सरकार वकीलों व जजों को न्याय देने में हर संभव सहयोग करेगी।
हाईकोर्ट ने कहा- वकीलों की हड़ताल न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान
कहा कि वकीलों की हड़ताल न केवल अवैध, गैर सैद्धांतिक है अपितु न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान है। यह व्यावसायिक कदाचार है। संविदा भंग, न्यास भंग, कर्तव्य भंग है। वकील हड़ताल कर कोर्ट के कीमती समय को बर्बाद करते है। इससे संस्था की छवि धूमिल होती है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि वकीलों की हड़ताल या बायकाट, खासकर वादकारियों सहित न्याय व्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचाती है। कोर्ट ने कहा कि गंभीर प्रयासों के बावजूद वकील हड़ताल पर आमादा है। इनका यह कार्य न्याय देने में बाधक है। यह कोर्ट की अवमानना के सिवाय कुछ नहीं। जिस पर दोनों बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष व महासचिवों को नोटिस जारी कर तलब किया है।