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एयरफोर्स के लिए अधिग्रहीत जमीन पर भूमिधरी का दावा रद्द

Sun, 28 Apr 2019 01:15 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 28 Apr 2019 01:15 AM IST
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Land Acquisition Land Acquired for Air Force

हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर स्थित तिलपत बाम्बिंग रेंज में वायुसेना के लिए अधिग्रहीत भूमि पर भूमिधरी का दावा कर जमीन पर सरकार द्वारा कब्जा लेने के खिलाफ दाखिल याचिका रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ किसी के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री होने मात्र से उसका दावा पुख्ता नहीं होता है। याचिका में 1950 में वायुसेना के लिए हुए भूमि अधिग्रहण को चुनौती दी गई थी। नगलीसागपुर गौतमबुद्ध नगर के हरिश्चंद्र की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति डा. वाईके श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई की।

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याची का कहना था कि नगली सागपुर गांव में उसकी 2.295 हेक्टेयर भूमिधरी की जमीन है, जिसको कब्जे में लेने के लिए प्रदेश सरकार और वायुसेना में चिन्हीकरण कर लिया है। याचिका में मांग की गई कि सरकार को जमीन के चिन्हीकरण से रोका जाए। याची का कहना था कि उसने जमीन का बाकायदा बैनामा कराया है। जमीन खरीदने से पहले उसने जांच की थी और अब राजस्व रिकार्ड में यह जमीन उसकेे नाम से दर्ज है। 2017 में तिलपत बाम्बिंग रेंज में अवैध कब्जा किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी।
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इस पर लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि वायुसेना के लिए 1950 में अधिग्रहीत भूमि यूपी और हरियाणा की सीमा में आती है। यूपी में यह इलाका पहले बुलंदशहर में था। बाद में इसे गौतमबुद्ध नगर में शामिल कर लिया गया। दो गांवों नगला नगली और नगला सागपुर में कुल 485 हेक्टेयर भूमि यूपी के हिस्से में आती है। इसमें से अधिकांश में कब्जा कर लिया गया और राजस्व रिकार्ड में हेरफे र कर दूसरे लोगों का नाम दर्ज करा दिया गया।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी ने जांच के बाद अधिग्रहीत भूमि का चिन्हीकरण शुरू कर दिया है। इसके खिलाफ याचिका दाखिल हुई। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता का कहना था कि इस मामले में दाखिल याचिकाएं सुप्रीमकोर्ट तक से खारिज हो चुकी हैं। कोर्ट ने कहा कि याची ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका, जिससे जमीन पर उसका दावा साबित होता हो। सिर्फ बैनामे के आधार पर जमीन पर दावा साबित नहीं होता है। 

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