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अरबों खर्च फिर भी गंगा-यमुना में गिर रहे गंदे नाले, कुंभ नगरी को प्रदूषण मुक्त नहीं कर सका प्रशासन

Fri, 25 Jan 2019 10:56 AM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: shubham Updated Fri, 25 Jan 2019 10:56 AM IST
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Dirty Drains falling in Ganga Yamuna in Prayagraj Kumbh Mela 2019
file
कुंभ मेला 2019 के लिए सरकार ने अरबों रुपये का बजट दिया, लेकिन गंगा और यमुना में गंदे नालों का गिरना बंद नहीं हुआ। इसके चलते कुंभ नगरी को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सका। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को पवित्र जल में स्नान कराने की बात तो प्रशासन कर रहा है, लेकिन सच्चाई इससे इतर है। कुंभ नगरी से होकर बहने वाली गंगा और यमुना में नालों का गिरना अनवरत जारी है।
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इस क्रम में रसूलाबाद में कई नाले गंगा में लगातार गिर रहे हैं। इन पर किसी प्रकार की कोई रोक नहीं है। रसूलाबाद में गंगा से मिलकर यह गंदा पानी संगम तक पहुंचता है। वहीं इस बार तो कुंभ मेला क्षेत्र फाफामऊ तक बसाया गया है।
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इसके चलते वहां पर बसे हुए श्रद्धालु गंगा स्नान कर रहे हैं। अब यह जल कैसा है, इससे उनका कोई मतलब नहीं है। इसी प्रकार शहर पश्चिमी में यमुना के जल में भारी मात्रा में गंदा पानी गिराया जा रहा है।
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इसके साथ ही अनेक गंदे नाले यमुना में गिर रहे हैं। इन सभी गंदे नालों का यह पानी भी वहां से चलकर सीधे संगम तक जा रहा है। जिससे संगम की पवित्रता प्रभावित हो रही है। अरैल क्षेत्र में बसे श्रद्धालु भी ऐसे ही जल में स्नान कर रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होना स्वाभाविक है।

नालों का गंदा पानी गंगा में गिर रहा

इसी तरह झूंसी क्षेत्र में भी नालों का गंदा पानी गंगा में गिर रहा है। हालांकि यहां पर नालों का पानी कुछ साफकर छोड़ा जा रहा है। लेकिन यह पानी भी स्नान करने तक के योग्य नहीं है।  गंगा और यमुना में कई नाले खुले तौर पर गिर रहे हैं।

जिनके बारे में न तो गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और न ही कुंभ प्रशासन ने कोई कार्रवाई की। जबकि कम से कम कुंभ नगरी के नाले तो गंगा और यमुना में गिरने से रोके जा सकते थे। 

कुंभ नगरी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए वर्ष 1986 से योजनाएं लगातार चल रही हैं। लेकिन आज तक इनमें पूरी तरह से सफलता नहीं मिल सकी। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 33 वर्ष से ज्यादा का समय हो चुका है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यह ड्रीम प्रोजेक्ट आज तक परवान नहीं चढ़ सकी। इस मद में प्रयागराज में भारी रकम खर्च की जा चुकी है। सीवर लाइन बिछाने कार्य भी किया जा रहा है। लेकिन इन नालों को आज तक गंगा और यमुना में गिरने से नहीं रोका जा सका है।
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