देश के पांच राज्यों में चमगादडों पर हुए अध्ययन में मिले कोरोना वायरस से इंसानों में में संक्रमण का फिलहाल कोई खतरा नहीं नहीं है। जानकार ऐसा मानते हैं कि कोरोना संक्रमण चमगादड़ से फैलने की आशंका भले ही है मगर पूरी दुनिया में आज तक इसकी पुष्टि नहीं हुई कि कोरो ना वायरस का संक्रमण चमगादडों से ही फैला है ।
सावधानी जरुरी, पर चमगादडों से नहीं है खतरा
भारत के जिन राज्यों में चमगादडों में कोरोना पाया गया है वह भी नोबल नोबल भी नोबल नोबल कोरोना वायरस नहीं है। और ना ही उससे मनुष्यों में में मनुष्यों में संक्रमण का कोई साक्ष्य मौजूद है। उत्तर भारत समेत पूरे देश में चमगादडों की 8 प्रजातियां पाई जाती है। प्रयागराज और यूपी के अन्य जिलों में मिलने वाले चमगादड़ ों को को फ्लाइंग फॉक्स कहा जाता है यह आकार आकार में काफी बड़े और छोटे दोनों प्रकार के होते हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर के पी सिंह कहते हैं कि इस इलाके में अभी तक ऐसा रिसर्च तो ऐसा कुछ नहीं हुआ है मगर चमगादड़ से संक्रमण की संभावना नहीं के बराबर है। वह इसकी वजह भी बताते हैं, एक तो इऐसे कोई केस आज तक सामने नहीं आया है ।दूसरे चमगादड़ से मनुष्य का संपर्क नहीं के बराबर है चमगादड़ रात्रि चर होते हैं ये पेड़ों और गुफाओं में रहते और कीट पतंगे और फल खाते हैं इंसानों से उनका संपर्क नहीं होता है ।
दूसरे भारत में चमगादड़ खाया नहीं जाता है आदिवासी प्रजातियां भी चमगादड़ नहीं खाती नहीं खाती है इसलिए चमगादड़ से मनुष्य में संक्रमण जाने की आशंका नहीं है।इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग डॉ मुनीश भी चमगादड़ से मनुष्य में संक्रमण फैलने की आशंका को नकारते है। उनका कहना है कि चमगादड़ से संक्रमण फैलने की थ्योरी को चीन के वुहान से लिंक किया जा रहा है। मगर अभी तक किसी प्रतिष्ठित जनरल में ऐसी कोई रिसर्च नहीं आई है जो इस थ्योरी की पुष्टि करती हो।
कोरोना वायरस का संक्रमण चमगादड़ से फैलने की चर्चा के बाद आम लोगो में चमगादडों को लेकर डर बैठ गया है। अल्लापुर निवासी एस बी उपाध्याय बताते है कि उनके मकान के पीछे पेड़ पर काफी चमगादड़ रहते है। कोरोना वायरस संक्रमण के बाद से अब उनसे डर लगता है कि कही संक्रमण न फ़ैल जाय। चमगादडों को दूर रखने के लिए रात भर लाइट जला कर रखी जाती है।