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काशी विश्वनाथ मंदिर-मस्जिद विवाद : ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Thu, 09 Sep 2021 05:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 Sep 2021 05:49 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार 15 अक्तूबर 1991 को स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ मंदिर की तरफ से वाराणसी में सिविल जज जूनियर डिवीजन के समक्ष दीवानी मुकदमा दाखिल किया।

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Kashi Vishwanath temple-mosque dispute: Allahabad High Court bans ASI survey of Gyanvapi Masjid
काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में ज्ञानवापी स्थित काशी विश्वेश्वरनाथ मंदिर मस्जिद विवाद को लेकर जिला अदालत में 1991 से विचाराधीन दीवानी मुकदमे की सुनवाई प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि दीवानी मुकदमे की पोषणीयता को लेकर यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की  याचिका पर हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर रखा है, जिसकी जानकारी अधीनस्थ अदालत को है। ऐसे में न्यायिक अनुशासन का पालन करते हुए सिविल कोर्ट को मंदिरों का सर्वे कराने की अर्जी तय नहीं नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार व अन्य विपक्षियों को तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार 15 अक्तूबर 1991 को स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ मंदिर की तरफ से वाराणसी में सिविल जज जूनियर डिवीजन के समक्ष दीवानी मुकदमा दाखिल किया। जिसमें प्लाट संख्या 9130 मौजा शहर खास के दो हिस्सों का हवाला दिया गया है। इसमें एक पुराना ज्ञानवापी मंदिर, तहखाना, चार मंडप, ज्ञान कूप, मूर्तियां व पेड़ पर हिन्दुओं के आधिपत्य एवं उत्तरी गेट पर नौबतखाना व मस्जिद के दावे पर सवाल उठाए गए हैं।

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यह भी दावा किया गया है कि इस्लामिक कानून में विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं हो सकती। औरंगजेब उसका स्वामी नहीं है। सतयुग से आजतक स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की प्रतिमा है, जिसे हटाया नहीं जा सकता। बोर्ड ने आपत्ति की कि उपासना स्थल विशेष उपबंध कानून 1991 के अंतर्गत विवादित उपासना स्थल को लेकर दीवानी मुकदमा दाखिल नहीं किया जा सकता। वर्ष 1947 की स्थिति में परिवर्तन नहीं किया जाएगा।


सिविल जज ने मुकदमा खारिज कर दिया। इस आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी मंजूर कर ली गई। मुकदमे की सुनवाई शुरू होने पर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। कोई स्थगनादेश न होने से अधीनस्थ अदालत में सर्वे कराने की अर्जी की सुनवाई करते हुए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को पूरे क्षेत्र का सर्वे करने का आदेश दिया। इसमें एक बीघा 9 विस्वा 6 धुर जमीन को चिन्हित करने, नक्शा बनाने और मूर्तियों की स्थिति दर्शाने का आदेश दिया गया है। साथ ही तहखाने का निरीक्षण करने को कहा गया है, जिसे इन याचिकाओं में चुनौती दी गई है। याचिकाओं की अगली सुनवाई आठ अक्तूबर को होगी।

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