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यूपी: न्यायपालिका के लिए दुर्भाग्य का दिन
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति एसएन शुक्ल पर सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की घटना को कानूनविद् न्यायपालिका के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना मानते हैं। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि आरोप हैं तो जांच भी जरुरी है ताकि असलियत सामने आ सके। मगर ऐसी घटनाओं से न्यायपालिका की साख को झटका जरूर लगता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति जस्टिस रवींद्र सिंह का मानना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, इससे न्याय व्यवस्था में लोगों की आस्था घटेगी। वहीं बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्व चेयरमैन वरिष्ठ अधिवक्ता बीके श्रीवास्तव का मानना है कि यदि भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तो उसकी जांच होना जरूरी है। प्रथम दृष्टया आरोपों में बल होने पर ही मुख्य न्यायाधीश ने मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दी होगी। जांच होने से कम से कम सच्चाई लोगोें के सामने आ जाएगी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा भी मानते हैं कि न्यायपालिका पर ऐसी कार्रवाई से समाज में गलत असर जाएगा। न्याय व्यवस्था की साख को ऐसी घटनाओं से झटका लगता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय का मानना है कि ऐसे मामलों में इन हाउस इंक्वायरी की व्यवस्था होनी चाहिए। मौजूदा स्थिति का समाज में अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति जस्टिस रवींद्र सिंह का मानना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है, इससे न्याय व्यवस्था में लोगों की आस्था घटेगी। वहीं बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्व चेयरमैन वरिष्ठ अधिवक्ता बीके श्रीवास्तव का मानना है कि यदि भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तो उसकी जांच होना जरूरी है। प्रथम दृष्टया आरोपों में बल होने पर ही मुख्य न्यायाधीश ने मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दी होगी। जांच होने से कम से कम सच्चाई लोगोें के सामने आ जाएगी।
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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा भी मानते हैं कि न्यायपालिका पर ऐसी कार्रवाई से समाज में गलत असर जाएगा। न्याय व्यवस्था की साख को ऐसी घटनाओं से झटका लगता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय का मानना है कि ऐसे मामलों में इन हाउस इंक्वायरी की व्यवस्था होनी चाहिए। मौजूदा स्थिति का समाज में अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
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