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हाईकोर्ट: दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरोपी सबूतों के अभाव में भी 12 साल तक जेल में रहा, दुष्कर्म के दोषी को किया बरी
Thu, 02 May 2024 05:25 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 02 May 2024 05:25 PM IST
सार
मामले में ननकू सिंह पर 2012 में किशोरी की हत्या व दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में थाना जैतीपुर, शाहजहांपुर में दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 23 जून 2016 को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और जुर्माना भी लगाया। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई।
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अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या व दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए युवक को बरी कर दिया। इस दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरोपी के खिलाफ कोई सबूत नहीं होने के बावजूद उसे 12 साल तक जेल में रहने के लिए मजबूर किया गया। न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति अजहर हुसैन इदरीसी की कोर्ट ने ननकू सिंह की ओर से दायर की गई आपराधिक अपील पर यह फैसला सुनाया।
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मामले में ननकू सिंह पर 2012 में किशोरी की हत्या व दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में थाना जैतीपुर, शाहजहांपुर में दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 23 जून 2016 को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और जुर्माना भी लगाया। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। याची अधिवक्ता ने कहा कि अपीलकर्ता को किशोरी के माता-पिता के संदेह पर झूठा फंसाया गया है। अभियोजन पक्ष की ओर से दोषसिद्धि के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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अपीलकर्ता 2012 से जेल में है। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने सजा निर्णय का समर्थन किया।कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता के खिलाफ कोई ठोस सबूत न होने के बाद भी वह 12 साल से जेल में है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा। ट्रायल कोर्ट ने प्रस्तुत किए गए साक्ष्य का ठीक से मूल्यांकन नहीं किया। अपील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने दोषसिद्धि व सजा के आदेश को रद्द कर दिया।
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