High Court : पूर्व एमएलए विजय सिंह के बेटों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक, हाईकोर्ट ने दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व एमएलए विजय सिंह के घर में हुए विस्फोट मामले में उनके दो बेटों की गिरफ्तार पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अविनाश उर्फ विक्की और अभिषेक उर्फ सिक्की की याचिका पर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व एमएलए विजय सिंह के घर में हुए विस्फोट मामले में उनके दो बेटों की गिरफ्तार पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अविनाश उर्फ विक्की और अभिषेक उर्फ सिक्की की याचिका पर दिया है।
फर्रुखाबाद के कोतवाली थाना क्षेत्र के मछरट्टा इलाके में पूर्व विधायक विजय सिंह के आवास पर मार्च 2026 को जोरदार धमाका हुआ था। पूर्व विधायक के दो बेटों समेत कई लोग घायल हुए थे। पुलिस ने अवैध विस्फोटक पदार्थ संग्रह कर निर्माण करने व अन्य आरोपों में विधायक के बेटे अभिनाश उर्फ विक्की व अभिषेक उर्फ सिक्की और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। आरोपियों ने दर्ज एफआईआर को रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद की ओर से पेश की गई विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्टों का बारीकी से संज्ञान लिया। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि प्राथमिकी में दर्ज घटना का कारण कोई विस्फोटक पदार्थ नहीं बल्कि रसोई गैस सिलिंडर जैसा कोई अन्य स्रोत है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकारी अधिवक्ता को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के मामले में देवरिया पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) देवरिया में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी मामले में अधीक्षण अभियंता की ओर से दाखिल हलफनामे को अपर्याप्त मानते हुए उन्हें 11 मई को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मेसर्स मां शारदा निर्माण की याचिका पर दिया है।
याची फर्म की बोली को विभाग की ओर से पहले ही स्वीकार कर लिया गया था लेकिन बाद में मूल्यांकन समिति की सिफारिश का हवाला देते हुए पूरे टेंडर को ही निरस्त कर दिया गया। विभाग ने इसके बाद प्रतिभागियों की संख्या बढ़ाने के लिए अर्हता की शर्तों में ढील देते हुए नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए। विभाग के इस कदम को याची फर्म ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि एक बार बोली स्वीकार हो जाने के बाद मूल्यांकन समिति की भूमिका समाप्त हो जाती है। समिति की सिफारिश के आधार पर टेंडर निरस्त करना और बाद में नियमों में ढील देना प्रथम दृष्टया अनुचित प्रतीत होता है। न्यायालय ने विभागीय स्पष्टीकरण को अधूरा माना और अधीक्षण अभियंता को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर रहें।
मुकदमे से बरी सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी की पेंशन पर निर्णय ले एसपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर एसपी को आपराधिक मामले में दोषमुक्त हो चुके एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी कृष्ण मोहन मिश्रा की पेंशन और सेवा निवृत्ति लाभों के भुगतान पर चार हफ्ते में निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत ने दिया है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि वाराणसी जीआरपी कैंट में दर्ज एक मुकदमे के कारण एसपी गाजीपुर ने अक्टूबर 2022 में याची की पेंशन व अन्य लाभों पर आंशिक रोक लगा दी थी। अब याची उस मामले में अदालत से बरी हो चुका है। लिहाजा, नियमानुसार याची पूर्ण भुगतान का हकदार है।