{"_id":"5f21b4b569cd3c6156538690","slug":"inspector-died-after-corona-report-came-negative","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद दरोगा की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद दरोगा की मौत
Wed, 29 Jul 2020 11:11 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 29 Jul 2020 11:11 PM IST
विज्ञापन
कोरोना
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुलिस विभाग के जिला कंट्रोल रूम के रेडियो शाखा में तैनात दरोगा मनोज गौतम की बुधवार को स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में मौत हो गई। वह कोरोना पॉजिटिव थे, लेकिन 28 जुलाई को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। फेफड़े में संक्रमण होने के कारण उन्हें मेडिसिन आईसीयू में रखा गया था। जिले में किसी पुलिस अधिकारी की यह पहली मौत है।
मूलत: गाजीपुर जिले के रहने वाले वाले सब इंस्पेक्टर मनोज गौतम यहां धूमनगंज के मनोहरपुरम में रहते थे। उनमें कोरोना की पुष्टि 18 जुलाई को हुई थी। इसके बाद उन्हें स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया था। वहां उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया था। कोरोना के नोडल इंचार्ज डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि 28 जुलाई को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। इसके बाद उन्हें मेडिसिन आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। लेकिन, बुधवार की सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
उन्हें निमोनिया हो गया था। इस वजह से फेफड़े बुरी तरह से संक्रमित हो गए थे। मौत के बाद शव को उनके परिजनों को सौंपा गया। दरोगा मनोज गुप्ता की मौत वैसे ही हुई, जैसे पूर्व में एसीएमओ डॉ. गणेश प्रसाद की मौत हुई थी। उनके भी फेफड़े में इन्फेक्शन हो गया था। चिकित्सकों का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि कोरोना रिपोर्ट भले ही निगेटिव आ जाए, लेकिन उससे संक्रमण का खतरा उसके बाद भी बना रहता है। दरोगा की मौत से पुलिस विभाग में हड़कंप है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मूलत: गाजीपुर जिले के रहने वाले वाले सब इंस्पेक्टर मनोज गौतम यहां धूमनगंज के मनोहरपुरम में रहते थे। उनमें कोरोना की पुष्टि 18 जुलाई को हुई थी। इसके बाद उन्हें स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया था। वहां उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया था। कोरोना के नोडल इंचार्ज डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि 28 जुलाई को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। इसके बाद उन्हें मेडिसिन आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। लेकिन, बुधवार की सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
विज्ञापन
उन्हें निमोनिया हो गया था। इस वजह से फेफड़े बुरी तरह से संक्रमित हो गए थे। मौत के बाद शव को उनके परिजनों को सौंपा गया। दरोगा मनोज गुप्ता की मौत वैसे ही हुई, जैसे पूर्व में एसीएमओ डॉ. गणेश प्रसाद की मौत हुई थी। उनके भी फेफड़े में इन्फेक्शन हो गया था। चिकित्सकों का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि कोरोना रिपोर्ट भले ही निगेटिव आ जाए, लेकिन उससे संक्रमण का खतरा उसके बाद भी बना रहता है। दरोगा की मौत से पुलिस विभाग में हड़कंप है।
विज्ञापन