अतीत के पन्नों में : 11 साल इलाहाबाद के खुसरोबाग में कैद रहा मुगल शहजादा जहांगीर
शहजादा मिर्जा मोहम्मद जहांगीर बख्त बहादुर जो मुगल सल्तनत के अंतिम से पूर्व शासक अकबर द्वितीय का बेटा था, खुसरोबाग में 11 साल तक ईस्ट इंडिया कंपनी की कैद रहा। इसे कंपनी के एक अफसर को अपमानित करने और उसकी हत्या के प्रयास में दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था।
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मुगल शासन के दौरान प्रयागराज के महत्व को लेकर फिलहाल तीन घटनाओं का ही उल्लेख चर्चित ंहै। एक, किला जिसे बादशाह अकबर ने बनवाया था। दूसरा, खुसरोबाग जहां बादशाह जहांगीर के बड़े बेटे मिर्जा खुसरो, उसकी मां मनभावती बाई (आम्बेर राजा भगवंत दास की बेटी) और उसकी बहन निथार बेगम दफन है। हालांकि कुछ इतिहासकार बताते हैं कि निथार बेगम का मकबरा यहां जरूर बन गया था लेकिन उसे आगरा में बादशाह अकबर की कब्र के पास दफनाया गया था।
तीसरा, किले में 6 अगस्त 1765 को हुई इलाहाबाद संधि, जो बादशाह शाह आलम द्वितीय और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई थी। कंपनी की ओर से राबर्ट क्लाइव ने दस्तखत किए थे। इसमें देश के एक बड़े हिस्से में टैक्स वसूलने से लेकर शासन करने का अधिकार बादशाह से छीनकर कंपनी ने अपने हाथ ले लिया था।
बहरहाल, एक चौथी घटना भी इतिहास में अंकित है, लेकिन इसके बारे में दस्तावेजों पर बहुत कम उल्लेख मिलता है। शहजादा मिर्जा मोहम्मद जहांगीर बख्त बहादुर जो मुगल सल्तनत के अंतिम से पूर्व शासक अकबर द्वितीय का बेटा था, खुसरोबाग में 11 साल तक ईस्ट इंडिया कंपनी की कैद रहा। इसे कंपनी के एक अफसर को अपमानित करने और उसकी हत्या के प्रयास में दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था। अकबर शाह द्वितीय के बाद उसका बड़ा बेटा सिराजुद्दीन जफर यानी बहादुर शाहर जफर गद्दी पर बैठा और उसके बाद से मुगल सल्तनत का अंत हो गया।