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Prayagraj : सिविल कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट हैरान, कहा-इन्हें प्रशिक्षण की जरूरत
Thu, 05 Sep 2024 12:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 05 Sep 2024 12:38 PM IST
सार
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने शैलेंद्र उर्फ शंकर वर्मा की द्वितीय अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। साथ ही सिविल सूट में विवादित प्रॉपर्टी पर यथा स्थिति कायम रखने का आदेश दिया है।
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अदालत
- फोटो : ANI
विस्तार
हाईकोर्ट ने अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन मैनपुरी और अपर जिला जज (फास्ट ट्रैक) कोर्ट मैनपुरी के आदेशों पर हैरानी जताई है। कहा कि दोनों अधिकारियों को प्रशिक्षण पर भेजे जाने की जरूरत है। कोर्ट ने जिला जज मैनपुरी को प्रकरण भेजा दिया और कहा वह इस मामले को देखें।
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न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने शैलेंद्र उर्फ शंकर वर्मा की द्वितीय अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। साथ ही सिविल सूट में विवादित प्रॉपर्टी पर यथा स्थिति कायम रखने का आदेश दिया है। मामले में मैनपुरी की अदालत में दाखिल एक सिविल सूट में प्रतिवादी शैलेंद्र ने अपनी प्रथम अपील खारिज होने के बाद उसके खिलाफ हाईकोर्ट में द्वितीय अपील दाखिल की। कोर्ट ने सिविल सूट पर आदेश के विरुद्ध दाखिल प्रथम अपील पर हुए आदेशों का अवलोकन करते हुए कहा कि ऐसा लगता है अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन मैनपुरी को जवाबी दावे के बारे में या इससे कैसे निपटना है कि समझ नहीं है।
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यह आश्चर्यजनक है कि बचाव पक्ष ने दो गवाह प्रस्तुत किए, लेकिन उनके मौखिक कथन पर कोई विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में न तो वादी और न ही जवाबी दावा दाखिल करने वाले के केस का कोई जिक्र है। जो निष्कर्ष निकाला गया है, उसका भी कोई अर्थ नहीं निकलता है। यही स्थिति निर्णय के क्रियात्मक हिस्से की है, जिसमें लिखा गया है कि प्रतिवादी का सूट निरस्त किया जाता।
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कोर्ट ने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से अपर जिला जज कक्ष संख्या दो भी इसकी प्रक्रिया को समझने में असफल रहे। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि दोनों अदालतें सिविल कोर्ट के रूप में अपने कर्तव्य के निर्वहन में असफल रहीं। निर्णय लिखने की मात्र औपचारिकता निभाई है। कोर्ट ने कोर्ट ने द्वितीय अपील सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी किया है।