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निर्भया फंड के इस्तेमाल करने को लेकर हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

Fri, 08 Jan 2021 08:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 08 Jan 2021 08:20 PM IST
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High court seeks response from UP government for using Nirbhaya fund
Allahabad High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंसा पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं की सहायता के लिए बनाए गए  निर्भया फंड इस्तेमाल न करने की शिकायत को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है और याचिका को सुनवाई के लिए 2 फरवरी को पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका में निर्भया फंड राशि के साथ खर्च तथा महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाये गए कदमों का ब्योरा देने की मांग की गयी है।
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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति  एस. शमशेरी की खंडपीठ ने अधिवक्ता ममता सिंह की जनहित याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि 2013 में हुए निर्भया कांड  के बाद  केंद्र सरकार ने एक हज़ार करोड़ की राशि स्वीकृति की थी। इस राशि को महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा में खर्च करना था, जिसके लिए केंद्र सरकार ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्भया फंड बनाकर एकत्र करोड़ों की राशि राज्य सरकारों को आवंटित की गयी और राज्य सरकार द्वारा इस फंड को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया ।
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अब तक महज 11 प्रतिशत खर्च हुआ फंड

याची का कहना है कि अब तक पूरी राशि का मात्र 11 प्रतिशत (252 करोड़) ही खर्च किया गया है। 18 राज्यों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल 15 प्रतिशत फंड खर्च किया गया । 2019 तक महाराष्ट्र में एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया। त्रिपुरा और केरल ने अपने निर्भया फंड से मात्र तीन प्रतिशत, मणिपुर ने चार प्रतिशत, गुजरात, पश्चिम बंगाल और दिल्ली ने पांच प्रतिशत खर्च किया और तेलंगाना, कर्नाटक और उड़ीसा ने अपने निर्भया फंड से केवल 6 प्रतिशत व्यय किया।
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महिलाओं के प्रति हिंसा की घटनाओं में रिकॉर्ड वृद्धि

याचिका के मुताबिक महिला और बालिकाओं के विरुद्ध हिंसा में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है । 2015 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की 3,29,243 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2016 में यह बढ़कर 3,38,954 हो गईं और 2017 में यह आंकड़ा 3,59, 849 को छू गया। बालिकाओं के विरुद्ध भी हिंसा के आंकड़े दिल दहलाने वाले हैं । 2015, 2016 , 2017 में इनकी संख्या क्रमश: 94,172, 1,06958 और 1,29032 रही। ये सारे आंकड़े सरकार के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो पर उपलब्ध हैं। याची का यह भी कहना है कि 2017 में देश में बलात्कार की 32,559 घटनाएं रिपोर्ट हुईं, जिसमें बालिकाओं से दुष्कर्म की घटनाएं 17,382 (53 प्रतिशत) रहीं। उत्तर प्रदेश में अपहरण की 8721 घटनाओं में 80. 67 प्रतिशत अपहरण बालिकाओं के हुए हैं। याचिका में अपराध पर नियंत्रण करने तथा अपराध पीड़िताओ के इलाज, पुनर्वास आदि के लिए बने फंड का सदुपयोग करने का समादेश जारी करने की मांग की गयी है।
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