फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High court quashed FIR filed against Acta general secretary in pandemic act

आक्टा महासचिव के खिलाफ महामारी अधिनियम में दर्ज प्राथमिकी हाईकोर्ट ने की रद्द

Thu, 12 Nov 2020 08:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Nov 2020 08:58 PM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट नेऑक्टा महासचिव और यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज में अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उमेश प्रताप सिंह के खिलाफ महामारी अधिनियम में दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी है। कोर्ट ने प्रो. सिंह के खिलाफ गलत तरीके से प्राथमिकी दर्ज कराने पर  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कोटवा बनी, प्रयागराज के सुपरिंटेंडेंट डॉ अमृत लाल यादव व केेंद्र व्यस्थापक पर पांच हजार रुपये का हर्जाना लगाते हुए यह धनराशि अपने वेतन से जमा करने का निर्देश दिया है। डा. उमेश की याचिका पर यह आदेश जस्टिस  पंकज नकवी व जस्टिस  विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है ।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्राथमिकी दुर्भावना से प्रेरित होकर दर्ज कराई गई है। यदि प्रशासन फेसबुक पर क्वारंटाइन सेंटर की अव्यवस्था और उसकी कमियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों के आधार पर अपनी व्यवस्था में सुधार करता या इस पोस्ट के बाद उसमें इंगित की गई कमियों में सुधार लाता और अपनी व्यवस्थागत कमियों को दूर करता तो वह इस बात की प्रशंसा करते।
विज्ञापन


मगर प्रशासन ने ऐसा कुछ ना करके अपने कृत्य को न्यायोचित ठहराने का प्रयास किया। कोर्ट ने कहा कि इससे ऐसा लगता है जैसे राज्य का अपने अधिकारियों पर नियंत्रण ख़त्म हो रहा है और वे विरोध के किसी स्वर को उठने ही नहीं देना चाहते हैं। वस्तुत: सुधारवादी आवाजों के प्रति असहिष्णुता प्रदर्शित करने के लिए प्रशासन दोषी है और यह न्याय के प्रशासन में एक प्रकार का हस्तक्षेप है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मालूम हो कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ बी के सिंह और  उनके कुछ शुभचिंतकों के बीच हुई बातचीत के आधार पर ऑक्टा महासचिव डॉ उमेश  ने प्रयागराज के कोटवा क्वॉरेंटाइन सेंटर की बदहाली पर फेसबुक पर टिप्पणी की थी। बाद में डॉ बीके सिंह ने अपनी बात का खंडन किया और और कहा कि वहां कोई अव्यवस्था नहीं है। प्रशासन की तरफ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटवा बनी, प्रयागराज के सुपरिटेंडेंट डॉ अमृत लाल यादव ने 23 जून 2020 को डॉ उमेश  के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। जिसमें आईपीसी की मानहानि की धाराओ 500 (2) और 500 में अपराध दर्ज किया गया। 24 जून को ही महामारी (संशोधन) विधेयक 2020 की धारा 3(2) के अंतर्गत एक नई धारा जोड़ दी गई।

इसके विरुद्ध डॉ उमेश प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी।  उनके वकील एके त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी क्वारंटाइन सेंटर की अव्यवस्था और उसकी कमियों को उजागर करने  किसी भी प्रकार से मानहानि का अपराध नहीं बनता है। और न ही  महामारी (संशोधन) विधेयक 2020 के अंतर्गत किसी प्रकार का अपराध बनता है। कोर्ट का भी  मानना है कि यदि कोई नागरिक प्रशासन की व्यवस्था से असंतुष्ट होकर फेसबुक पर कोई पोस्ट लिखता है तो इसे वैमनस्य बढ़ाने वाला अथवा व्यवस्था को बदनाम करने  वाली प्रिंटेड विषय वस्तु  के रूप में नहीं देखा जा सकता है । इस कारण यह महामारी एक्ट की धाराओं के अंतर्गत नहीं आता है ।


हाईकोर्ट में डॉ अमृत लाल यादव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। कोर्ट ने कहा कि ना तो डॉक्टर यादव और ना ही सरकार के अधिवक्ता यह बता पाए कि उक्त धाराओं में किस आधार  पर याची के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed