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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Punishment cannot be given if there is a long gap between the last sighting and the discovery

High Court : अंतिम बार देखे जाने व शव मिलने के बीच लंबा अंतराल होने पर नहीं दी जा सकती सजा

Sat, 07 Feb 2026 02:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 Feb 2026 02:48 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आखिरी बार साथ देखे जाने और शव मिलने के समय के बीच बड़ा अंतराल है तो इस आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने हत्या के मामले में अनूप सिंह और राम कुमार की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।

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High Court: Punishment cannot be given if there is a long gap between the last sighting and the discovery
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आखिरी बार साथ देखे जाने और शव मिलने के समय के बीच बड़ा अंतराल है तो इस आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने हत्या के मामले में अनूप सिंह और राम कुमार की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की पीठ ने दिया है।

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सहारनपुर निवासी अनूप सिंह और राम कुमार पर आरोप था कि उन्होंने सात फरवरी 1992 को चंद्रपाल उर्फ चंद्रप्रकाश का अपहरण किया था। नौकरी दिलाने के नाम पर लिए गए रुपये न लौटाने पर उसकी हत्या कर दी गई। मृतक का शव नौ फरवरी 1992 को फरीदाबाद के बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन के पास मिला था। ट्रायल कोर्ट ने 2005 में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि मृतक को आखिरी बार सात फरवरी को शाम छह बजे देखा गया था, जबकि शव नौ फरवरी को दोपहर में मिला। कोर्ट ने कहा कि इस लंबे अंतराल के कारण किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के अनुसार मौत चलती ट्रेन से गिरने के कारण भी हो सकती थी, जो एक दुर्घटना की ओर इशारा करता है। इसके अलावा कोर्ट ने अन्य कई तथ्यों के आधार पर संदेह का लाभ देते हुए दोनों को बरी कर दिया।

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