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Shaque Review: जेनिफर के 'बेहद' की दुनिया में परिणीति की एंट्री, गुमशुदा बेटी और सब पर ‘शक’; देखें या नहीं?

Thu, 24 Sep 2026 01:15 PM IST
Kiran Vinod Kumar Jain किरण जैन
Updated Thu, 24 Sep 2026 01:15 PM IST
सार

Shaque Trust No One Web Series Review: परिणीति चोपड़ा की डेब्यू ओटीटी सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ रिलीज हो चुकी है। यहां जानिए क्या है इसकी कहानी…

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Parineeti chopra starrer Shaque web series review and rating jennifer winget tahir raj bhasin and soni rajdan
वेब सीरीज 'शक' - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
वेब सीरीज 'शक'
कलाकार
परिणीति चोपड़ा , जेनिफर विंगेट , ताहिर राज भसीन , सोनी राजदान , अनूप सोनी , हरलीन सेठी , सुमीत व्यास और ध्रुव चौधरी
लेखक
रेन्सिल डी’सिल्वा , अब्बास दलाल , हुसैन दलाल , रीवा राजदान कपूर , सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा और कौसर मुनीर
निर्देशक
रेन्सिल डी’सिल्वा
निर्माता
सपना मल्होत्रा और सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा
रिलीज डेट
24 सितंबर 2026
रेटिंग
3/5

विस्तार

बेटी नौ साल की हो चुकी है, लेकिन अन्विता की तलाश अब भी खत्म नहीं हुई।  पुलिस केस की जांच करती रहती है, परिवार जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश करता है, लेकिन मां वहीं अटकी रहती है। फिर हर साल उसके पास एक तस्वीर आती है। तस्वीर में एक बच्ची है। सवाल है, ये तस्वीर भेज कौन रहा है और क्यों? वह हर उस बच्ची में अपनी बेटी को तलाशती है, जो उसे थोड़ी भी जानी-पहचानी लगती है।
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नेटफ्लिक्स की ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ इसी सवाल से अपना सस्पेंस रचती है। लेकिन इसकी कहानी सिर्फ एक मिसिंग चाइल्ड की तलाश नहीं है। यह भरोसे की कहानी भी है। पति पर शक है, दोस्त पर शक है, परिवार पर शक है, नए पड़ोसियों पर शक है और धीरे-धीरे दर्शक को खुद मां की नजर पर भी शक होने लगता है। यही इस सीरीज की खूबी है और यही इसकी कमजोरी भी।
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क्योंकि सात एपिसोड तक हर नया खुलासा कहानी को आगे बढ़ाता है .. लेकिन आखिरी जवाब मिलने के बाद कुछ कड़ियां कमजोर पड़ने लगती हैं।

Parineeti chopra starrer Shaque web series review and rating jennifer winget tahir raj bhasin and soni rajdan
वेब सीरीज 'शक' - फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
एक मां से उसकी बच्ची छिन जाए और नौ साल बाद भी उसे यकीन हो कि बेटी जिंदा है, तो उसके लिए हर चेहरा एक सुराग बन सकता है और हर छोटी-सी बात एक शक। ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ इसी मानसिक स्थिति को अपनी कहानी का आधार बनाती है।

कहानी की शुरुआत शिमला से होती है, जहां अन्विता (परिणीति चोपड़ा) एक बेटी को जन्म देती है। लेकिन उसी दिन नवजात बेटी अपेक्षा अस्पताल से गायब हो जाती है। अब पति आलोक (ताहिर राज भसीन) के साथ अन्विता ने फैसला किया है कि जब तक बेटी वापस नहीं आती, वे उसका जन्मदिन मनाते रहेंगे। हर साल जन्मदिन पर अन्विता को एक बच्ची की तस्वीर मिलती है। यही तस्वीरें उसकी उम्मीद भी हैं और उसके जुनून की वजह भी।

कहानी में आठ साल का लीप आता है। अन्विता की जिंदगी आगे बढ़ चुकी है। उसकी दूसरी बेटी है, पति है, परिवार है। लेकिन उसके भीतर पहली बेटी की तलाश वहीं अटकी हुई है। वह इलाज और थेरेपी से गुजर रही है। परिवार उसे समझाने की कोशिश करता है कि अब उसे आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन एक मां के लिए आठ साल पुराना सवाल इतना आसानी से खत्म नहीं होता।
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वेब सीरीज 'शक' - फोटो : सोशल मीडिया
शक की सुई हर एक किरदार की तरफ घूमती है:
  • क्या अन्विता की बचपन की दोस्त श्रेया (हरलीन सेठी) और आलोक के बीच अतीत में कुछ ऐसा था जो छुपाया जा रहा है?
  • श्रेया का पति और डॉक्टर भास्कर (सुमीत व्यास) जिस अवैध सरोगेसी के जाल से जुड़ा है, उसका इस मामले से क्या ताल्लुक है?
  • अन्विता की सास (सोनी राजदान) इतनी कठोर और असहज क्यों रहती हैं?
  • पुलिस इंस्पेक्टर खुराना (अनूप सोनी) इस उलझे हुए जाल को सुलझाने में कहां तक पहुंच पाते हैं?
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वेब सीरीज 'शक' - फोटो : सोशल मीडिया
अभिनय
परिणीति चोपड़ा: परिणीति इससे पहले साइकोलॉजिकल मिस्ट्री थ्रिलर ‘द गर्ल ऑन द ट्रेन' में भी एक ऐसे किरदार को निभा चुकी हैं, जहां डर, भ्रम और सच के बीच फर्क करना मुश्किल था। ‘शक’ में भी उन्हें कुछ वैसी ही मानसिक बेचैनी से गुजरना है, लेकिन इस बार वह एक मां के नजरिए से कहानी देखती हैं। अन्विता की बेचैनी और शक को वह अच्छी तरह पकड़ती हैं, खासकर उन सीन्स में जहां उन्हें लगता है कि उनकी बेटी सामने है। लेकिन ‘द गर्ल ऑन द ट्रेन'  में उनकी मानसिक उथल-पुथल ज्यादा गहरी और असरदार लगी थी। ‘शक’ में दर्द, डर और गुस्से के बीच फर्क कई जगह साफ नहीं दिखता। लगातार मानसिक तनाव में रहने वाले किरदार में उनके एक्सप्रेशंस कई जगह एक जैसे लगते हैं। हालांकि, इसके पीछे किरदार की लिखावट का भी हाथ है, जो अन्विता को हर सीन में पूरी तरह खुलने का मौका नहीं देती।

जेनिफर विंगेट: ‘बेहद’ में अपने इंटेंस और खुलकर भावनाएं दिखाने वाले अभिनय के लिए याद की जाती हैं। ‘शक’ में उनका अभिनय ज्यादा सधा हुआ है। साक्षी के किरदार में वह चेहरे के भाव, नजरों और आवाज के उतार-चढ़ाव से काम लेती हैं। खासकर अन्विता के सामने उनके रिएक्शन में एक साथ सहजता और कुछ छिपाने का भाव दिखता है। ‘बेहद’ में जहां उनका अभिनय ज्यादा आक्रामक था, यहां वह कम करके किरदार का रहस्य बनाए रखती हैं। यही बदलाव उनकी एक्टिंग की रेंज दिखाता है।

ताहिर राज भसीन, हरलीन सेठी और सुमीत व्यास: ताहिर ने आलोक की घबराहट और छिपे तनाव को सहजता से निभाया है। हरलीन के रिएक्शन कम हैं, लेकिन श्रेया के किरदार का रहस्य बनाए रखते हैं। सुमीत व्यास भी भास्कर के बदलते तेवरों में अच्छा बैलेंस रखते हैं।

सोनी राजदान और अनूप सोनी: अनुभवी एक्ट्रेस सोनी राजदान का अभिनय सख्त है, लेकिन उसमें मां की चिंता भी दिखती है। अनूप सोनी बिना ज्यादा हाव-भाव के खुराना के किरदार में ठीक हैं।
 

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वेब सीरीज 'शक' - फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
रेन्सिल डी'सिल्वा इससे पहले ‘कुर्बान’, ‘24’ और ‘डायल 100’ जैसी फिल्मों और शोज में सस्पेंस बुनने की अपनी कला साबित कर चुके हैं। ‘शक’ में भी वह शिमला की सर्द और कोहरे भरी दुनिया के जरिए वही बेचैनी और तनाव पैदा करने में कामयाब रहते हैं।

शुरुआती एपिसोड्स की एडिटिंग चुस्त है। छोटे-छोटे सुराग धीरे-धीरे सामने आते हैं और दर्शक खुद उनके बीच कड़ियां जोड़ता है। पुरानी तस्वीरों और सोशल मीडिया पोस्ट को मिलाने वाले सीक्वेंस में यह तरीका खास तौर पर काम करता है। हालांकि, कुछ जगह कहानी की रफ्तार बनाए रखने के लिए घटनाओं को थोड़ा ज्यादा खींचा गया है।
 

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वेब सीरीज 'शक' - फोटो : सोशल मीडिया
क्या काम नहीं करता?

भटकाने वाले ट्रैक:तांत्रिक बाबा, टैरो कार्ड और अवैध सरोगेसी जैसे ट्रैक शुरुआत में कहानी में नए सवाल जोड़ते हैं, लेकिन आगे चलकर इनका असर सीमित रह जाता है। इनसे रहस्य तो लंबा होता है, पर मुख्य कहानी को उतनी गहराई नहीं मिलती।

किडनैपिंग का लॉजिक: अस्पताल से नवजात बच्ची का इतनी आसानी से गायब हो जाना कहानी की कमजोर कड़ी है। जिस घटना पर पूरी कहानी टिकी है, उसके इस हिस्से को ज्यादा विश्वसनीय तरीके से लिखने की जरूरत थी।

भावनात्मक गहराई: नौ साल से बेटी का इंतजार कर रही अन्विता की बेचैनी साफ दिखाई देती है, लेकिन उसके लंबे इंतजार और अंदर जमा दर्द को कहानी उतना महसूस नहीं कराती। किरदार की पीड़ा दिखाई ज्यादा देती है, महसूस कम होती है।

क्लाइमैक्स का असर: इतने लंबे बिल्ड-अप के बाद जब रहस्य खुलता है, तो खुलासा चौंकाने से ज्यादा कहानी की कुछ कमजोर कड़ियां सामने ले आता है। यहां सीरीज  का असर थोड़ा कम पड़ जाता है।
 

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वेब सीरीज 'शक' - फोटो : सोशल मीडिया
देखें या नहीं?
‘शक: ट्रस्ट नो वन’ की सबसे बड़ी ताकत इसका सवाल है, और सबसे बड़ी कमी उस सवाल के जवाब में है। शुरुआत के एपिसोड कहानी में दिलचस्पी बनाए रखते हैं और हर किरदार पर शक करने की वजह देते हैं। परिणीति चोपड़ा और जेनिफर विंगेट भी अपने-अपने किरदारों को संभालती हैं। लेकिन अंत तक आते-आते कहानी से उठाए गए कई सवालों के जवाब उतना असर नहीं छोड़ते।
अगर आपको धीरे-धीरे खुलने वाली मिस्ट्री और किरदारों के बीच शक का खेल पसंद है, तो यह सीरीज देखी जा सकती है। बस इससे बहुत दमदार क्लाइमैक्स की उम्मीद न रखें।
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