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High Court : विभागीय जांच में बरी तो नोटिस बिना नहीं दे सकते चेतावनी दंड, कमांडेंट होमगार्ड का आदेश रद्द

Fri, 08 Aug 2025 10:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 08 Aug 2025 10:24 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि विभागीय जांच रिपोर्ट से सक्षम अधिकारी सहमत या असहमत हो सकते हैं। दोबारा जांच करने का आदेश दे सकते हैं लेकिन दोषमुक्त कर्मचारी के खिलाफ बिना सुनवाई का मौका दिए चेतावनी का दंड नहीं दिया जा सकता।

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High Court: If acquitted in departmental inquiry, warning penalty cannot be given without notice
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि विभागीय जांच रिपोर्ट से सक्षम अधिकारी सहमत या असहमत हो सकते हैं। दोबारा जांच करने का आदेश दे सकते हैं लेकिन दोषमुक्त कर्मचारी के खिलाफ बिना सुनवाई का मौका दिए चेतावनी का दंड नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा नियमानुसार चेतावनी दंड से कर्मचारी की पदोन्नति के समय उसके पांच अंक काटे जाते हैं। इसलिए यह दंड बिना सुनवाई के नहीं दिया जा सकता।

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कोर्ट ने मंडलीय कमांडेंट होमगार्ड मेरठ के 31 दिसंबर 2024के आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने धर्म देव मौर्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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धर्म देव मौर्य गौतम बुद्ध नगर में होमगार्ड की ड्यूटी पर तैनात थे। इस दौरान उनके कार्यालय के अभिलेखों में आग लग गई। इस मामले में उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई। जांच रिपोर्ट में उन्हें आरोप मुक्त कर दिया गया। याची का निलंबन रद्द कर बहाल कर दिया गया और कार्यवाही समाप्त कर दी गई लेकिन इसके बाद लापरवाही के लिए चेतावनी जारी की गई तो चुनौती दी।
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अधिवक्ता विभु राय ने दलील दी कि जब याची दोषमुक्त हो गया तो चेतावनी का दंड नहीं दिया जा सकता। 27 सितंबर 2019 के शासनादेश में स्पष्ट है कि किसी कर्मचारी को चेतावनी का दंड देने से पहले कारण बताओ नोटिस दिया जाना जरूरी है। इसका पालन नहीं किया गया। याची को आरोप सिद्ध होने पर ही दंडित किया जा सकता है। नियमावली में चेतावनी के दंड का विधान नहीं है। इसलिए चेतावनी आदेश अवैध है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद मंडलीय कमांडेंट होमगार्ड मेरठ के चेतावनी आदेश को रद्द कर दिया।

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