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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Failure to pass the AIBE within two years of registration will bar one from practicing law.

High Court : पंजीकरण के बाद दो साल में एआईबीई पास नहीं किया तो नहीं कर सकेंगे वकालत, हाईकोर्ट का फैसला

Sun, 09 Aug 2026 08:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 09 Aug 2026 08:43 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 2009-10 और उसके बाद कानून की डिग्री हासिल वाले अधिवक्ता बार कौंसिल में पंजीकरण के बाद के दो साल तक अदालतों में प्रैक्टिस कर सकते हैं।

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High Court: Failure to pass the AIBE within two years of registration will bar one from practicing law.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 2009-10 और उसके बाद कानून की डिग्री हासिल वाले अधिवक्ता बार कौंसिल में पंजीकरण के बाद के दो साल तक अदालतों में प्रैक्टिस कर सकते हैं। इस अवधि में ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (एआईबीई) पास नहीं करने पर वे किसी अदालत के समक्ष अधिवक्ता के रूप में पेश नहीं हो सकेंगे। हालांकि, वे बाद में एआईबीई में शामिल होकर परीक्षा पास कर सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने दिया है।

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जौनपुर निवासी योगेंद्र की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान एकलपीठ के समक्ष यह प्रश्न आया कि बार कौंसिल में नामांकन कराने वाला अधिवक्ता यदि दो वर्ष के भीतर एआईबीई पास नहीं करता है तो क्या वह अदालत में पेश हो सकता है। कोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया के एआईबीई नियमों और 12 अप्रैल 2013 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि 2009-10 और उसके बाद के कानून स्नातकों के लिए एआईबीई पास करना अनिवार्य है।
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दो वर्षों में परीक्षा पास नहीं करने पर वकालत का अधिकार समाप्त हो जाएगा। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट में प्रैक्टिस के लिए बार कौंसिल का प्रोविजनल एनरोलमेंट ही पर्याप्त नहीं है। संबंधित अधिवक्ता का नाम हाईकोर्ट की एडवोकेट रोल में होना जरूरी है। फैसले में सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस के पांच साल पूरे होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। कोर्ट ने कहा कि केवल पांच साल की अवधि पूरी होने और सर्टिफिकेट का सत्यापन या नवीनीकरण नहीं होने से प्रैक्टिस का अधिकार तत्काल खत्म नहीं होगा। यह रोक तभी प्रभावी होगी जब बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश गैर-प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं की सूची प्रकाशित कर दे।

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