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इलाहाबाद हाईकोर्ट : घरेलू हिंसा अधिनियम में डिफॉल्टर से सख्ती से निपटा जाए, रिकवरी वारंट जारी करना सही नहीं

Tue, 25 Apr 2023 11:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 25 Apr 2023 11:50 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद के मामले में सुनवाई करते हुए निचली अदालत पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालत ने डिफॉल्टर से सख्ती से पेश आने की बजाय उसके खिलाफ फिर से रिकवरी वारंट जारी कर सही नहीं किया है।

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High Court - Defaulter should be strictly dealt with in the Domestic Violence Act
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद के मामले में सुनवाई करते हुए निचली अदालत पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालत ने डिफॉल्टर से सख्ती से पेश आने की बजाय उसके खिलाफ फिर से रिकवरी वारंट जारी कर सही नहीं किया है। कहा कि घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम की धारा 31 के प्रावधानों के तहत एक डिफॉल्टर से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया। यह भी कहा कि अंतरिम संरक्षण आदेश अपराध है। कोर्ट ने इसे गैर जमानती और संज्ञेय बताया है। कहा कि निचली अदालत को अपराध के अनुसार अधिकतम सजा देने के लिए दंडित करना चाहिए। प्रतिवादी पति अहमद अली ने याची यानी पूर्व पत्नी और दिव्यांग बच्चे को सड़क पर ला दिया और दूसरी पत्नी के साथ जीवन का आनंद उठा रहा है।
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कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम की धारा 31 के तहत पति के खिलाफ कार्रवाई करने और रखरखाव राशि की वसूली के लिए चल या अचल संपत्ति नीलाम करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने मुरादाबाद की हसीना खातून की ओर से दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

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मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याची के पति अहमद अली को भरण-पोषण की राशि (दो लाख, 62 हजार रुपये) न दे पाने की वजह से तीस दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बावजूद जब रखरखाव की राशि अदा नहीं की गई तो याची ने अर्जी दाखिल कर रिकवरी वारंट जारी करने की मांग की। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फिर से रिकवरी वारंट जारी करते हुए अंतरिम रखरखाव की राशि को जमा करने के लिए समय दे दिया। याची ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कोर्ट ने इस संबंध में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश 23 जनवरी 2023 के आदेश को रद्द कर दिया और मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह नए सिरे से नोटिस जारी कर 15 मई 2023 तक रखरखाव राशि को भुगतान करने का आदेश करे। कोर्ट ने पहले से तय किए गए अंतरिम भत्ते आठ हजार रुपये को भी 30 अप्रैल तक देने को कहा। कोर्ट ने कहा है कि अगर पति निर्धारित अवधि में भरण-पोषण की पूरी बकाया राशि जमा करने में विफल रहता है तो न्यायिक मजिस्ट्रेट घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम की धारा 31 के तहत पति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर रखरखाव की राशि को चल या अचल संपत्ति के जरिये वसूल करेगा।

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