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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court decision The date of birth recorded for the first time in the service book cannot be changed

हाईकोर्ट का फैसला : सर्विस बुक में प्रथम बार दर्ज जन्मतिथि बदली नहीं की जा सकती, भले ही बोर्ड ने सुधार दिया हो

Sat, 25 Nov 2023 04:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 25 Nov 2023 04:42 PM IST
सार

यह निर्णय जस्टिस मंजीव शुक्ला ने झांसी जिले में प्राथमिक विद्यालय में नौकरी कर रही अध्यापिका कविता कुरील की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याचिका दाखिल कर अध्यापिका ने बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी के 19 अप्रैल 2023 के उसे आदेश को चुनौती दी थी।

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High Court decision The date of birth recorded for the first time in the service book cannot be changed
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कर्मचारी के सर्विस बुक में प्रथम बार दर्ज जन्म तिथि संशोधित नहीं की जा सकती। फैसले में कोर्ट ने आगे कहा कि भले ही जन्मतिथि को संशोधित कर सही कर दिया गया हो, लेकिन नौकरी के समय सर्विस बुक में रिकॉर्ड की गई जन्मतिथि बाद में सर्विस बुक में संशोधित नहीं की जा सकती।

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यह निर्णय जस्टिस मंजीव शुक्ला ने झांसी जिले में प्राथमिक विद्यालय में नौकरी कर रही अध्यापिका कविता कुरील की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याचिका दाखिल कर अध्यापिका ने बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी के 19 अप्रैल 2023 के उसे आदेश को चुनौती दी थी, जिसके द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपने पूर्व पारित आदेश दिनांक 25 मई 2023 को वापस ले लिया था तथा यूपी रिक्रूटमेंट आफ सर्विस (डिटरमिनेशन आफ डेथ ऑफ़ बर्थ)  रूल्स 1994 के नियम दो के तहत टीचर की सर्विस बुक में रिकॉर्ड की गई जन्मतिथि को संशोधित करने से मना कर दिया था।
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याची टीचर की तरफ से उसके अधिवक्ता के एस कुशवाहा का कहना था कि याची का का हाईस्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार डेट ऑफ बर्थ तीन नवंबर 1967 है। इसे माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सर्टिफिकेट में अपनी गलती मानते हुए ठीक भी कर दिया है। ऐसी स्थिति में हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर उक्त नियमावली के तहत याची अध्यापिका के सर्विस बुक में जन्मतिथि तीन नवंबर 1960 की जगह 3 नवंबर 1967 दर्ज किया जाए। 

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2006 में हुई थी नियुक्ति

बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी की तरफ से अधिवक्ता रामानंद पांडेय का कहना था कि याची की नियुक्ति बतौर सहायक अध्यापिका वर्ष 2006 में औरैया में हुई थी। हाईस्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार उस समय याची की उम्र तीन नवंबर 1960 दर्ज थी। सर्टिफिकेट के आधार पर और उसमें दर्ज जन्मतिथि को आधार मानते हुए सर्विस बुक में तीन नवंबर 1960 जन्मतिथि दर्ज की गई।

याची का तबादला औरैया से झांसी हो गया और याची टीचर के रूप में स्कूल सुल्तानपुरा की माता, चिरगांव, झांसी में कार्यरत रही है और अब सर्विस बुक में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर रिटायर कर दी गई है। कहा गया कि हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर ही उसका जन्म तिथि दर्ज हुआ है और ऐसी स्थिति में माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा भले ही जन्म तिथि संशोधित कर दी गई हो, इस आधार पर सर्विस बुक में संशोधन नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के तर्क को माना सही

कोर्ट ने अपने फैसले में बेसिक शिक्षा परिषद के तर्क को सही मानते हुए कहा है कि यूपी रिक्रूटमेंट आफ सर्विस ( डिटरमिनेशन का डेट ऑफ़ बर्थ) रूल्स 1974 के नियम दो के अनुसार सर्विस बुक में हाईस्कूल रिकॉर्ड के आधार पर दर्ज की गई जन्म-तिथि में संशोधन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अपने फैसले में इस नियमावली का विस्तार से जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस नियमावली में प्रतिपादित सिद्धांत को आधार बनाते हुए फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यह नियमावली अपने आप में स्पष्ट है और इसमें कोई दुविधा नहीं है कि सर्विस बुक में दर्ज की गई जन्मतिथि में संशोधन नहीं किया जा सकता और वह भी तब जब कर्मचारी रिटायरमेंट के करीब हो।

मामले के अनुसार हाई स्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार याची टीचर की जन्मतिथि तीन नवंबर 1960 दर्ज थी। उसके प्रोविजनल सर्टिफिकेट में तीन नंबर 1967 दर्ज था। हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर उसके सर्विस बुक में जन्मतिथि 3 नवंबर 1960 रिकॉर्ड हुई। काफी समय नौकरी करने के बाद याची ने वर्ष 1997 एवं 1998 में सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को अर्जी देकर जन्मतिथि संशोधन करने की मांग की। वर्ष 2021 में जन्मतिथि संशोधित होकर हाई स्कूल सर्टिफिकेट मिला और इसके बाद याची ने सर्विस बुक में संशोधित जन्म तिथि दर्ज करने की मांग की थी। जिसे बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी ने करने से मना कर दिया था।

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