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High Court : कोर्ट ने केंद्रीय विधि मंत्रालय से नोटरी के अधिकार के दायरे के बारे में मांगा जवाब

Thu, 15 Aug 2024 03:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 15 Aug 2024 03:12 PM IST
सार

याची ने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ 30 फरवरी 2024 को जामा मस्जिद, जैतवारा, मुरादाबाद में अपनी मर्जी से मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की। इसके बाद प्रयागराज में ‘वैवाहिक अनुबंध पत्र’ शीर्षक के साथ एक नोटरी हलफनामा तैयार कराया।

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High Court: Court seeks reply from Union Law Ministry on scope of notary's power
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी विवाह को वैध बनाने के लिए जाली कागजात के प्रयोग पर चिंता जताई है। कोर्ट ने पाया कि अपने माता-पिता के खिलाफ जाकर शादी करने वाले अधिकांश जोड़े नोटरीकृत वैवाहिक अनुबंध पत्र जैसे कागजात का प्रयोग विवाह को वैध बनाने के लिए करते हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा है कि क्या नोटरी को वैवाहिक अनुबंध पत्र जैसे कागजातों का नोटरीकृत करने की अनुमति है। न्यायालय ने केंद्रीय विधि मंत्रालय से इस संबंध में नोटरी के अधिकार के दायरे के बारे में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने सना परवीन व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।

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याची ने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ 30 फरवरी 2024 को जामा मस्जिद, जैतवारा, मुरादाबाद में अपनी मर्जी से मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की। इसके बाद प्रयागराज में ‘वैवाहिक अनुबंध पत्र’ शीर्षक के साथ एक नोटरी हलफनामा तैयार कराया। इसके बाद इन्हीं कागजातों के आधार पर याचिका दायर कर सुरक्षा की गुहार लगाई। अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील ने दलील दी कि दस्तावेजों की जांच करने पर वह जाली प्रतीत होते हैं। ऐसा लग रहा है कि न्यायालय से सुरक्षा आदेश प्राप्त करने के लिए इन्हें प्रयोग किया गया।

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कोर्ट ने कहा कि अक्सर नोटरी की ओर से नोटरीकृत किए गए ऐसे दस्तावेजों के आधार पर विवाहों को पंजीकृत किया जाता है। कोर्ट ने केंद्रीय विधि मंत्रालय से नोटरी के अधिकार के दायरे के बारे में जवाब मांगा है। आदेश दिया कि अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में एक हलफनामा दायर किया जाए। न्यायालय ने कहा कि विधि मंत्रालय के संयुक्त सचिव से अपेक्षा की जाती है कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता के साथ देखें। क्योंकि, यह मुद्दा विवाह की पवित्रता से संबंधित है।

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