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इलाहाबाद हाईकोर्ट : जमींदार की हत्या में अभियुक्त को कोर्ट ने 41 बाद किया बरी, गवाह को लेकर की अहम टिप्पणी

Tue, 15 Feb 2022 02:03 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 15 Feb 2022 02:03 AM IST
सार

कोर्ट ने पाया कि मामले में गवाह नंबर दो कि गवाही में आत्मविश्वास की कमी है। हालांकि, उसने घटना के समय मौके पर उपस्थिति को समझाने की कोशिश की। बताया कि वह अपनी पत्नी और भतीजी के साथ बीरापुर जा रहा था।

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High Court: Court acquitted the accused after 41 in the murder of the landlord, important remarks regarding the witness
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के हंडिया थाने में 41 वर्ष पूर्व हुई घटना के दोषी को मुक्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अभियोजन पक्ष केवल गवाहों के बयान पर टिका है लेकिन वे विश्वसनीयता के पैमाने पर खरे नहीं उतर रहे। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र व न्यायमूर्ति समीर जैन ने याची गुलाब व अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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कोर्ट ने पाया कि मामले में गवाह नंबर दो की गवाही में आत्मविश्वास की कमी है। हालांकि, उसने घटना के समय मौके पर उपस्थिति को समझाने की कोशिश की। बताया कि वह अपनी पत्नी और भतीजी के साथ बीरापुर जा रहा था। उसने घटना को अपनी आंखों से देखा, लेकिन अभियोजन पक्ष गवाह नंबर दो की पत्नी और भतीजी की गवाही नहीं दिला सका, जिससे कि इस बात की पुष्टि कर सके कि गवाह अब्दुल वाहिद बीरापुर जा रहा था।
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कोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जरनैल सिंह बनाम पंजाब राज्य के फैसले का हवाला दिया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में कहा है कि मौके के गवाह के साक्ष्य के लिए बहुत सतर्क और करीबी जांच की आवश्यकता होती है और मौके के गवाह को घटनास्थल पर अपनी उपस्थिति को साबित करना पड़ता है।

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गवाह के बयान में नहीं था आत्मविश्वास

कोर्ट ने पाया कि याची और प्रतिवादी के बीच पुरानी रंजिश थी। इस वजह से अभियुक्तों को फंसाया गया था। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए याची को दोष मुक्त कर दिया। मामला 41 वर्ष पुराना है। प्रयागराज के हंडिया थाने में जमींदार शेख मोहम्मद और याची के बीच पुरानी रंजिश थी। शेख मोहम्मद ने जमीन के विवाद में याची गुलाब सहित तीन अन्य के खिलाफ दीवानी मुकदमा किया था।

हंडिया इलाके में 41 वर्ष पूर्व हुई थी घटना 
चार सितंबर 1980 को जब दीवानी मुकदमें में सुनवाई के बाद जब वह (जमींदार) घर जा रहा था। तभी, गुलाब व उसके तीन साथ (राम अवध, कृपाल, ननकू उर्फ नंदू) उसे खेत में खींच ले गए और वहां उसकी हत्या कर दी। निचली अदालत ने मामले में हत्या के अपराध में चारों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए आजीवन करावास की सजा सुनाई थी।

याची गुलाब व ननकू उर्फ नंदू ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने गवाहों के बयान की विश्वसनीयता में कमी पाते हुए याची गुलाब को दोषमुक्त कर दिया। जबकि, ननकू उर्फ नंदू की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। गुलाब जमानत पर जेल से बाहर था। कोर्ट ने निचली अदालत के सभी रिकॉर्ड भेजने का आदेश दिया।

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