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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court Allegation of an illicit relationship does not strip a woman of her status as a wife following her

हाईकोर्ट : पति की मौत के बाद अवैध संबंध के आरोप से पीड़िता का पत्नी का दर्जा खत्म नहीं होता

Thu, 08 Oct 2026 05:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 08 Oct 2026 05:08 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति की मृत्यु के बाद कथित अवैध संबंध के आरोप से पीड़िता का पत्नी का दर्जा समाप्त नहीं होता। केवल आरोपों के आधार पर किसी की वैध संतान या कानूनी उत्तराधिकारी का दर्जा नहीं छीना जा सकता।

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High Court Allegation of an illicit relationship does not strip a woman of her status as a wife following her
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति की मृत्यु के बाद कथित अवैध संबंध के आरोप से पीड़िता का पत्नी का दर्जा समाप्त नहीं होता। केवल आरोपों के आधार पर किसी की वैध संतान या कानूनी उत्तराधिकारी का दर्जा नहीं छीना जा सकता। इसके लिए कानून के अनुरूप ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम ने बलिया की एक महिला व अन्य की याचिका पर दिया है।

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वादी ने दावा किया था कि पीड़िता के पति की मौत हो गई और उनका किसी अन्य के साथ संबंध है। ऐसे में उन्हें पत्नी (विधवा) का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। वादी का यह भी कहना था कि महिला के दो बच्चे वैध संतान नहीं हैं। ट्रायल कोर्ट ने 1963 में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 488 के तहत हुए मामले के निष्कर्षों पर वादी के पक्ष में फैसला दिया था। इस आदेश को पीड़ित महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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हाईकोर्ट ने पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि वादी ने स्वयं पीड़िता का विवाह होना स्वीकार किया था। बाद में किसी अन्य व्यक्ति के साथ कथित संबंध उस दर्जे को स्वतः समाप्त नहीं कर सकते। बच्चों की वैधता पर सवाल उठाने के लिए वादी और एक गवाह की गवाही पर्याप्त नहीं थी। हाईकोर्ट ने बताया कि धारा 488 सीआरपीसी की कार्रवाई संक्षिप्त प्रकृति की होती है। इसका उद्देश्य केवल भरण-पोषण संबंधी राहत देना है। इसमें दर्ज निष्कर्षों को दीवानी मुकदमे में निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने पीड़िता की याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

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