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अधिकारी होते जा रहे कोर्ट के आदेश की अवहेलना के आदी: हाईकोर्ट
Sun, 28 Feb 2021 01:24 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 28 Feb 2021 01:24 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
सरकारी अधिकारियों द्वारा अदालतों के आदेश का पालन न करने की प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यह राज्य के लिए अफसोसजनक है कि अधिकारी कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के आदी हो गए हैं।अधिकारी समादेश का पालन नहीं करते।वादकारी को मजबूर होकर अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ती है। इस पर भी जब अदालत समय देती है तो अधिकारी उसकी अनदेखी करते है।और फिर से अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ती है।
कोर्ट ने दो बार समय दिए जाने और आदेश की सूचना के बाद भी निर्देश का पालन न करने पर कौशांबी एडी एम /भू अध्याप्ति अधिकारी मनोज कुमार व प्रोजेक्ट निदेशक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कानपुर पंकज मिश्र को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हे आदेश की अवमानना करने का आरोप निर्मित कर सजा दी जाए।कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति वी के बिड़ला ने जयंती पांडेय की अवमानना याचिका पर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि हर समादेश का पालन करें। ।कोर्ट ने सिक्स लेन सड़क के लिए अधिगृहीत जमीन का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जिसका पालन न करने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने अधिकारियों को एक और मौका दिया फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया। तो याची को दुबारा अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी।
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कोर्ट ने दो बार समय दिए जाने और आदेश की सूचना के बाद भी निर्देश का पालन न करने पर कौशांबी एडी एम /भू अध्याप्ति अधिकारी मनोज कुमार व प्रोजेक्ट निदेशक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कानपुर पंकज मिश्र को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हे आदेश की अवमानना करने का आरोप निर्मित कर सजा दी जाए।कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति वी के बिड़ला ने जयंती पांडेय की अवमानना याचिका पर दिया है।
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कोर्ट ने कहा है कि अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि हर समादेश का पालन करें। ।कोर्ट ने सिक्स लेन सड़क के लिए अधिगृहीत जमीन का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जिसका पालन न करने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने अधिकारियों को एक और मौका दिया फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया। तो याची को दुबारा अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी।
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