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स्मार्ट मीटरों पर पानी की तरह बहा पैसा
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स्मार्ट मीटरों की खरीद के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया है। ऊर्जा विभाग की ईईएसएल कंपनी ने एक मीटर पर चार से पांच हजार रुपये खर्च किए हैं। करार के मुताबिक इस रकम की वसूली भी ईईएसएल कंपनी उपभोक्ताओं की जेब से ही कर रही है। अकेले प्रयागराज में लगे स्मार्ट मीटरों की खरीद पर 40 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की बात कही जा रही है। अब इन मीटरों में खराबी की बात सामने आने के लिए अफसरों की चिंता बढ़ गई है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुतबिक कुछ स्मार्ट मीटरों की प्रयोगशालाओं में जांच शुरू करा दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद उचित कदम उठाया जाएगा।
ऊर्जा मंत्रालय की ईईएसएल कंपनी ने प्रयोग के तौर पर प्रयागराज शहर के सात डिवीजनों में दो लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसमें अब तक 82 हजार स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इस बीच एक साथ यूपी के कई जिलों के स्मार्ट मीटर एक साथ ठप होने, मीटर जंपिंग व मनमानी बिलिंग की शिकायतें आने के बाद स्मार्ट मीटरों को लगाने पर रोक लगा दी गई है, लेकिन अभी अफसर इसे हटाने पर निर्णय नहीं लिया जा सका है। बिजली विभाग के एक अफसर ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि एक स्मार्ट मीटर पर चार से पांच हजार रुपये की लागत आ रही है। ईईसीएल कंपनी ने अलग-अलग मीटर निर्माता कंपनियों सेे इसके लिए करार किया है।
इसके लिए प्रयागराज में अब तक 41 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। अफसरों का कहना है कि ईईसीएल कंपनी हर स्मार्ट मीटर उपभोक्ता की बिलिंग होने के साथ ही प्रति माह 80 रुपये बिजली विभाग से वसूल रही है। इस तरह 65.60 लाख रुपये उपभोक्ताओं की जेब से इन स्मार्ट मीटरों के नाम पर अलग से दिया जा रहा है। इससे बड़े पैमाने पर चपत लगने की आशंका है। स्मार्ट मीटर में गड़बड़ी की शिकायत आने के बाद जांच शुरू करा दी गई है। अभी इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ स्थानों पर क्रास मीटर लगाने पर रीडिंग में कोई अंतर नहीं आया है, लेकिन लैब की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। ओपी यादव, मुख्य अभियंता।
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ऊर्जा मंत्रालय की ईईएसएल कंपनी ने प्रयोग के तौर पर प्रयागराज शहर के सात डिवीजनों में दो लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसमें अब तक 82 हजार स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इस बीच एक साथ यूपी के कई जिलों के स्मार्ट मीटर एक साथ ठप होने, मीटर जंपिंग व मनमानी बिलिंग की शिकायतें आने के बाद स्मार्ट मीटरों को लगाने पर रोक लगा दी गई है, लेकिन अभी अफसर इसे हटाने पर निर्णय नहीं लिया जा सका है। बिजली विभाग के एक अफसर ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि एक स्मार्ट मीटर पर चार से पांच हजार रुपये की लागत आ रही है। ईईसीएल कंपनी ने अलग-अलग मीटर निर्माता कंपनियों सेे इसके लिए करार किया है।
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इसके लिए प्रयागराज में अब तक 41 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। अफसरों का कहना है कि ईईसीएल कंपनी हर स्मार्ट मीटर उपभोक्ता की बिलिंग होने के साथ ही प्रति माह 80 रुपये बिजली विभाग से वसूल रही है। इस तरह 65.60 लाख रुपये उपभोक्ताओं की जेब से इन स्मार्ट मीटरों के नाम पर अलग से दिया जा रहा है। इससे बड़े पैमाने पर चपत लगने की आशंका है। स्मार्ट मीटर में गड़बड़ी की शिकायत आने के बाद जांच शुरू करा दी गई है। अभी इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ स्थानों पर क्रास मीटर लगाने पर रीडिंग में कोई अंतर नहीं आया है, लेकिन लैब की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। ओपी यादव, मुख्य अभियंता।
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