बड़े हनुमान के द्वार से लौटीं गंगा, यमुना भी शांत, फिलहाल बाढ़ का खतरा टला
गंगा में छोड़ा गया पानी
हरिद्वार- 59,384 क्यूसेक
नरोरा- 33,805 क्यूसेक
कानपुर- 1,87,535 क्यूसेक
विस्तार
उफनाई गंगा शुक्रवार को लेटे हनुमान के द्वार पर दस्तक देने के बाद लौटने लगी हैं। फिलहाल एक सेंमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गंगा-यमुना के जलस्तर में कमी आने से कछारी इलाकों में बाढ़ से घिरे सैकड़ों परिवारों ने राहत की सांस ली है। हालांकि इस दिन भी हरिद्वार, नरोरा और कानपुर बांधों से गंगा में 2.80 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ दिए जाने से दोबारा बाढ़ ता संकट पैदा होने की आशंका है। जबकि, केन व बेतवा से लगातार पानी आने से यमुना में भी फिर जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
बेनी बांध स्थित हनुमान मंदिर के द्वार पर पहुंची गंगा शुक्रवार की दोपहर बाद घटने लगीं। दारागंज सब्जी मंडी के पीछे वाले हिस्से में पानी भरने के बाद गंगा की रफ्तार घटने के बावजूद लोग झोपड़पट्टी छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटकते रहे। काली मार्ग और लाल मार्ग के अलावा त्रिवेणी मार्ग व अलोपी बाग जाने वाले परेड के रास्तों के आसपास सैकड़ों गरीब परिवारों ने टेंट डाल लिया है।
सिंचाई बाढ़ घंटे के अभियंताओं के मुताबिक फिलहाल गंगा की रफ्तार कम हो गई है, लेकिन बाढ़ का खतरा बना हुआ है। तीर्थपुरोहितों ने शुक्रवार को बेनी बांध के अलावा परेड में ही पिंडदान और कर्मकांड कराया। बाढ़ देखने वालों की भीड़ लगने की वजह से पुलिस ने त्रिवेणी मार्ग, काली मार्ग से बांध वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर दी है।
देर शाम दोनों नदियों की रफ्तार कम हो गई, लेकिन मध्यप्रदेश से केन, बेतवा व चंबल के जरिए आ रहे पानी से यमुना का जलस्तर फिर बढ़ने की बात कही जा रही है। हालांकि एक सेंमी प्रति घंटा की रफ्तार से पानी गंगा-यमुना में घटने लगा है। सिंचाई बाढ़ खंड के नियंत्रण कक्ष के मुताबिक शाम को फाफामऊ में गंगा 81.49 मीटर और छतनाग में 80.60 मीटर पर बहती रहीं। इसी तरह नैनी में यमुना का जलस्तर 81.23 मीटर पर आ गया।