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प्रदूषण की फर्जी रिपोर्ट पर्यटन, विकास के लिए घातक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 15 May 2016 01:46 AM IST
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आख़िर समंदर का स्तर कितना ऊंचा उठ सकता है?
- फोटो : BBC
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट कि विश्व के शीर्ष सात प्रदूषित शहरों में इलाहाबाद तीसरे नंबर पर है, भले ही फर्जी निकल गई लेकिन यह रिपोर्ट इलाहाबाद के पर्यटन को प्रभावित कर सकती है। इस पूरे मामले में कमिश्नर राजन शुक्ला ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों से रिपोर्ट तलब की है ताकि फर्जी आंकड़े जारी करने वाली संस्था के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा-पढ़ी की जा सके। अफसरों का मानना है कि प्रदूषण पर अगर ऐसे ही मनगढ़ंत रिपोर्ट जारी होती रही तो कुंभ, अर्धकुंभ सहित कई खास मौकों पर इलाहाबाद का पर्यटन प्रभावित हो सकता है और इससे शहर की तरक्की में रोड़ा लग सकता है।
इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में चुना गया है। यहां विकास के लिए अमेरिका करोड़ों रुपये निवेश कर रहा है। कुंभ और महाकुंभ के दौरान संगमनगरी में लगातार दो माह देश और विदेश से करोड़ों पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। हर साल माघ मेले में भी लाखों श्रद्धालु संगम तीरे शिविर लगाकर रहते हैं। वैसे भी संगम और आनंद भवन पर वर्ष भर पर्यटकों के आने-जाने का सिलसिला जारी रहता है। इससे न सिर्फ शहर की बड़ी आबादी को रोजगार मिलता है, बल्कि रेलवे, रोडवेज और एयरवेज को भी खासी कमाई होती है। ऐसे में चार वर्ष पुराने यानी वर्ष 2012 के फर्जी आंकड़ों के आधार पर डब्ल्यूएचओ की प्रदूषण पर जारी रिपोर्ट इन सभी मामलों में इलाहाबाद को पीछे ले जा सकती है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट दुनिया भर में जारी की गई है और उसमें बताया गया है कि इलाहाबाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रदूषित शहर है। इससे अफसरों में हड़कंप मचा है। कमिश्नर राजन शुक्ला का कहना है कि इस रिपोर्ट पर शांत होकर नहीं बैठा जा सकता। यह इलाहाबाद की साख से जुड़ा मसला है। जांच में प्रथम दृष्टया साबित हो चुकी है कि रिपोर्ट गलत है। इसकी और गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है। उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है। सभी तथ्य जुटाने के बाद उस संस्था के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा-पढ़ी की जाएगी, जिसने इलाहाबाद आए बगैर गलत आंकड़े अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिए और उसी आधार पर डब्ल्यूएचओ ने इलाहाबाद को विश्व का तीसरा सबसे बड़ा प्रदूषित शहर घोषित कर दिया।
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इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में चुना गया है। यहां विकास के लिए अमेरिका करोड़ों रुपये निवेश कर रहा है। कुंभ और महाकुंभ के दौरान संगमनगरी में लगातार दो माह देश और विदेश से करोड़ों पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। हर साल माघ मेले में भी लाखों श्रद्धालु संगम तीरे शिविर लगाकर रहते हैं। वैसे भी संगम और आनंद भवन पर वर्ष भर पर्यटकों के आने-जाने का सिलसिला जारी रहता है। इससे न सिर्फ शहर की बड़ी आबादी को रोजगार मिलता है, बल्कि रेलवे, रोडवेज और एयरवेज को भी खासी कमाई होती है। ऐसे में चार वर्ष पुराने यानी वर्ष 2012 के फर्जी आंकड़ों के आधार पर डब्ल्यूएचओ की प्रदूषण पर जारी रिपोर्ट इन सभी मामलों में इलाहाबाद को पीछे ले जा सकती है।
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डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट दुनिया भर में जारी की गई है और उसमें बताया गया है कि इलाहाबाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रदूषित शहर है। इससे अफसरों में हड़कंप मचा है। कमिश्नर राजन शुक्ला का कहना है कि इस रिपोर्ट पर शांत होकर नहीं बैठा जा सकता। यह इलाहाबाद की साख से जुड़ा मसला है। जांच में प्रथम दृष्टया साबित हो चुकी है कि रिपोर्ट गलत है। इसकी और गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है। उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है। सभी तथ्य जुटाने के बाद उस संस्था के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा-पढ़ी की जाएगी, जिसने इलाहाबाद आए बगैर गलत आंकड़े अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिए और उसी आधार पर डब्ल्यूएचओ ने इलाहाबाद को विश्व का तीसरा सबसे बड़ा प्रदूषित शहर घोषित कर दिया।
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