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Prayagraj News: ई-रिक्शा बिगाड़ रहे शहर की सूरत
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शहर में बढ़ते ई-रिक्शा यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। मनमाने ढंग से कहीं भी सवारी चढ़ाने-उतारने और सड़क पर वाहन खड़ा करने से रोजाना प्रमुख चौराहों पर जाम लग रहा है। बिना संकेत अचानक मोड़ देने से जगह-जगह हादसे भी देखे जा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस इन्हें नियंत्रित नहीं कर पाई है।
शहर के जानसेनगंज, केंद्रीय जीएसटी कार्यालय, हनुमान मंदिर चौराहा, मिश्रा भवन, मेडिकल चौराहा, सोहबतिया बाग, बांगड़ चौराहा समेत अन्य जगहों पर सुबह और शाम के समय सबसे अधिक दबाव रहता है। यहां ई-रिक्शा चालक सड़क पर ही सवारी का इंतजार करते हैं। कई बार एक साथ कई ई-रिक्शा खड़े होने से पूरी लेन प्रभावित हो जाती है।
ट्रैफिक पुलिस ने 21 मई 2026 से शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कई व्यस्त और वीआईपी मार्गों पर ई-रिक्शा संचालन पर रोक लगाई थी। पहले चरण में इसे एक माह के प्रायोगिक आधार पर लागू किया गया। इसके तहत रामबाग फ्लाईओवर, सिविल लाइंस हनुमान मंदिर से सुभाष चौराहा, लक्ष्मी टाकीज से पुलिस क्लब चौराहा और कचहरी से विश्वविद्यालय मार्ग पर ई-रिक्शा के प्रवेश पर प्रतिबंध किया गया था। कुछ दिन यह व्यवस्था चली लेकिन इसके बाद फिर जस का तस हो गया।
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कार्रवाई का डर नहीं, तभी अराजकता
राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। ई-रिक्शा के लिए स्थायी स्टैंड, जीपीएस आधारित रूट निर्धारण, नो-स्टॉपेज जोन का कड़ाई से पालन, नियमित प्रवर्तन और बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। कार्रवाई का डर न होने की वजह से ही अराजकता है।
जाम की पांच बड़ी वजह
- सड़क पर ही सवारी चढ़ाना-उतारना।
- अवैध पार्किंग और स्टैंड की कमी।
- बिना इंडिकेटर अचानक मोड़ लेना।
- प्रतिबंधित मार्गों पर भी संचालन।
- ट्रैफिक नियमों का कमजोर अनुपालन।
ये तय किए गए थे वैकल्पिक मार्ग
तेलियरगंज की ओर से आने वाले ई-रिक्शा को फायर ब्रिगेड चौराहा, नवाब यूसुफ रोड होते हुए सिविल लाइंस रेलवे स्टेशन और हाईकोर्ट की ओर भेजने की व्यवस्था की गई। वहीं, बैरहना और संगम क्षेत्र से आने वाले ई-रिक्शा के लिए सीएमपी कॉलेज, मेडिकल चौराहा, डीआरएम कार्यालय मार्ग तय किया गया था। यातायात प्रभारी मनोज सिंह ने बताया कि जल्द ही मनमाने तरीके से चलने वाले ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
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शहर के जानसेनगंज, केंद्रीय जीएसटी कार्यालय, हनुमान मंदिर चौराहा, मिश्रा भवन, मेडिकल चौराहा, सोहबतिया बाग, बांगड़ चौराहा समेत अन्य जगहों पर सुबह और शाम के समय सबसे अधिक दबाव रहता है। यहां ई-रिक्शा चालक सड़क पर ही सवारी का इंतजार करते हैं। कई बार एक साथ कई ई-रिक्शा खड़े होने से पूरी लेन प्रभावित हो जाती है।
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ट्रैफिक पुलिस ने 21 मई 2026 से शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कई व्यस्त और वीआईपी मार्गों पर ई-रिक्शा संचालन पर रोक लगाई थी। पहले चरण में इसे एक माह के प्रायोगिक आधार पर लागू किया गया। इसके तहत रामबाग फ्लाईओवर, सिविल लाइंस हनुमान मंदिर से सुभाष चौराहा, लक्ष्मी टाकीज से पुलिस क्लब चौराहा और कचहरी से विश्वविद्यालय मार्ग पर ई-रिक्शा के प्रवेश पर प्रतिबंध किया गया था। कुछ दिन यह व्यवस्था चली लेकिन इसके बाद फिर जस का तस हो गया।
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कार्रवाई का डर नहीं, तभी अराजकता
राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। ई-रिक्शा के लिए स्थायी स्टैंड, जीपीएस आधारित रूट निर्धारण, नो-स्टॉपेज जोन का कड़ाई से पालन, नियमित प्रवर्तन और बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। कार्रवाई का डर न होने की वजह से ही अराजकता है।
जाम की पांच बड़ी वजह
- सड़क पर ही सवारी चढ़ाना-उतारना।
- अवैध पार्किंग और स्टैंड की कमी।
- बिना इंडिकेटर अचानक मोड़ लेना।
- प्रतिबंधित मार्गों पर भी संचालन।
- ट्रैफिक नियमों का कमजोर अनुपालन।
ये तय किए गए थे वैकल्पिक मार्ग
तेलियरगंज की ओर से आने वाले ई-रिक्शा को फायर ब्रिगेड चौराहा, नवाब यूसुफ रोड होते हुए सिविल लाइंस रेलवे स्टेशन और हाईकोर्ट की ओर भेजने की व्यवस्था की गई। वहीं, बैरहना और संगम क्षेत्र से आने वाले ई-रिक्शा के लिए सीएमपी कॉलेज, मेडिकल चौराहा, डीआरएम कार्यालय मार्ग तय किया गया था। यातायात प्रभारी मनोज सिंह ने बताया कि जल्द ही मनमाने तरीके से चलने वाले ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।