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नकली इंजेक्शन :तस्करों ने 15 दिन में डेढ़ हजार से ज्यादा बार की थी फोन से बात

Tue, 01 Jun 2021 03:10 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 01 Jun 2021 03:10 AM IST
सार

  • नकली इंजेक्शन की तस्करी करने वालों की सीडीआर से खुला राज

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Duplicate injection: Smugglers talked over phone more than one and a half thousand times in 15 days
ऑडियो वायरल

विस्तार

ब्लैक फंगस के नकली एम्फोनेक्स इंजेक्शन की तस्करी करने वाले चारों तस्करों ने पिछले 15 दिन के भीतर एक-दूसरे को डेढ़ हजार से ज्यादा फोन कॉल की थी। पुलिस ने उनके मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली तो इस बात का खुलासा हुआ। इस दौरान न सिर्फ फोन कॉल के रिकॉर्ड मिले, इंजेक्शन की खरीद-फरोख्त के संबंध में की गई चैटिंग के रिकॉर्ड व ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिली। इसके बाद ही उन पर शिकंजा कसा जा सका। 

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एसआरएन के ऑर्थोपेडिक विभाग में तैनात एक डॉक्टर की शिकायत पर कानपुर में पुलिस ने ज्ञानेश शर्मा व प्रकाश को पकड़ा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बरामद इंजेक्शन के बारे में पूछने पर ज्ञानेश ने सिर्फ इतना बताया कि उसने प्रयागराज स्थित ऑबलीगो मेडिकल स्टोर के संचालक पंकज अग्रवाल से यह इंजेक्शन लिए। हालांकि वह यही कहता रहा कि डॉक्टर की मदद करने के लिए उसने यह इंजेक्शन उपलब्ध कराए। गिरफ्तार किया गया प्रकाश तो सिर्फ ज्ञानेश से ही जान पहचान की बात कहता रहा।

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Duplicate injection: Smugglers talked over phone more than one and a half thousand times in 15 days
prayagraj news : इंजेक्शन - फोटो : prayagraj

इसी तरह प्रयागराज में पकड़े जाने के बाद पंकज अग्रवाल व मधुरम भी खुद को निर्दोष बताते रहे। पंकज का यह कहना था कि डॉक्टर ने उससे फोन के माध्यम से संपर्क किया था। जिसके बाद जरूरतमंद समझकर उसने उसे लखनऊ के अपने संपर्क से एंटी फंगल इंजेक्शन उपलब्ध कराए। उसका यह भी कहना था कि इंजेक्शन में नकली एम्फोनेक्स कहां से आया, इसकी उसे जानकारी नहीं है। पकड़ा गया चौथा आरोपी मधुरम भी यही कहता रहा कि दवा का कारोबार होने के नाते ही वह पंकज को जानता था और इससे ज्यादा दोनों का कुछ लेना देना नहीं था। काफी पूछताछ के बाद भी सभी ऐसे ही बयान देते रहे। हालांकि पुलिस ने जब मोबाइल की सीडीआर निकलवाई तो उनका झूठ सामने आ गया। 

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Duplicate injection: Smugglers talked over phone more than one and a half thousand times in 15 days
नकली रेमेडीविर इंजेक्शन - फोटो : Amar Ujala
सूत्रों के मुताबिक, पता चला कि चारों की पिछले 15 दिनों के भीतर आपस में डेढ़ हजार से ज्यादा बार फोन पर बात हुई थी। चारों ने एक-दूसरे को 1500 से ज्यादा फोन कॉल की थी। इसके बाद उनके मोबाइल की जांच की गई तो कई अन्य अहम सबूत मिले। इंजेक्शन व दवाओं की डील के संबंध में हुई चैटिंग के सबूत तो मिले ही, कई कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली। इनमें आपस में हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग के साथ ही कुछ ग्राहकों से हुई बातचीत की भी रिकॉर्डिंग शामिल थी। पुलिस ने जब इन सबूतों के बाबत पूछताछ की तो आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। 

सरगना के पकड़े जाने के बाद खुलेंगे राज

प्रकरण की जांच करने वाली टीम फिलहाल लखनऊ  स्थित मेडिकल एजेंसी संचालक व फैक्ट्री मालिक की तलाश में जुटी है। दरअसल पकड़े गए पंकज से पूछताछ में यही पता चला है कि वह कुर्सी रोड स्थित मेडिकल एजेंसी से इंजेक् शन लेता था। उसने यह भी बताया है कि एजेंसी में कुर्सी रोड स्थित फैक्ट्री से इंजेक्शन-दवाएं पहुंचती थी और वहीं निर्माण होता था। पुलिस अफसरों का कहना है कि पकड़े गए तस्करों के मोबाइल से कई अन्य नंबर भी मिले हैं। उनके बारे में भी जांच पड़ताल की जा रही है।
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