लॉकडाउन के कारण पानी के भाव बिक रहा है दूध, होटल, रेस्टोरेंट बंद होने से नहीं हो रही है खपत
कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देश में पिछले एक माह से चल रहे लॉकडाउन का सबसे बुरा असर गंगापार के फाफामऊ और झूंसी के दूध के कारोबारियों पर पड़ा है। लॉक डाउन के कारण होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट बंद चल रहे हैं। कई जगहों पर डेयरी पर भी ताला लगा हुआ है। तमाम बंदिशों के कारण शहर में दूधिए दूध की सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते रोजाना सैकड़ों लीटर होने वाली दूध की सप्लाई पर भारी असर पड़ा है। हालत यह है कि मजबूरी में दूध के कारोबारियों को आसपास के गांव में ही पचास से साठ रुपये लीटर दूध को पानी के भाव बेचना पड़ रहा है।
गंगापार के फाफामऊ इलाके में मोरहूं, सुमेरी का पूरा, घुरवा, पैगंबरपुर, सिंगारपुर तथा झूंसी के कछारी गांव बदरा-सोनौटी, ढोलबजवा आदि को दूध के कारोबार का हब माना जाता है। इन गांवों में तकरीबन हर घर के लोग दूध के कारोबार से जुड़े हुए हैं। सभी पशु-पालकों के साथ आधा दर्जन से लेकर डेढ़ से दो दर्जन गाय-भैंस है। इन गांवों से दूधिए रोजाना डेढ़ से दो हजार लीटर दूध की सप्लाई झूंसी, फाफामऊ समेत शहर के विभिन्न इलाकों में करते हैं।
दूध के कारोबार से ही इनके परिवार का भरण-पोषण होता है। पर पिछले एक माह से लॉक डाउन के कारण दूध का कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया है। ढाबा, रेस्टोरेंट, चाय की दुकान और डेयरियों के बाद होने से दूध की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ गई। इसके साथ ही ज्यादातर पशु पालक दूध से तैयार खोवा की सप्लाई भी शहर के खोवा मंडी में करते थे। दही भी भारी मात्रा में जगह-जगह सप्लाई की जाती है। लॉक डाउन में सबकुछ बंद होने के साथ ही मिठाई की दुकानों पर ताला लटकने से दूध के कारोबार पर दुगुनी चोट पड़ी है।
दूध कारोबारी रामसुचित यादव, राजेश कुमार यादव, राधेश्याम पटेल तथा बदरा-सोनौटी के हूबलाल यादव, कमलेश यादव, रामजियावन आदि का कहना है कि पशुओं को चारा, भूंसा, चूनी चोकर आदि की व्यवस्था करने में लॉकडाउन में पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में कारोबार के ठप होने से भारी नुकसान हो रहा है।