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हाईकोर्ट : शॉर्ट टर्म रिक्ति की पूर्व अनुमति नहीं लेने पर नियुक्ति निरस्त करने का डीआईओएस का आदेश रद्द
Sat, 21 Oct 2023 02:14 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 21 Oct 2023 02:14 PM IST
सार
जिला विद्यालय निरीक्षक वाराणसी द्वारा 15 मार्च 1999 के आदेश से याची की नियुक्ति को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि प्रबंध समिति ने इसके लिए डीआईओएस की पूर्व अनुमति नहीं ली थी।
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कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंशकालिक रिक्ति पर नियुक्त अध्यापक की 55 साल की आयु तक 24 साल की सेवा पूरी करने के बावजूद सेवा नियमित नहीं करने को गलत करार दिया है। मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक को चार माह में याची को नियमित कर नियमित वेतन भुगतान जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही शिक्षक के बकाया वेतन की मांग पर आदेश पारित करने का भी आदेश दिया है।
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जिला विद्यालय निरीक्षक वाराणसी द्वारा 15 मार्च 1999 के आदेश से याची की नियुक्ति को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि प्रबंध समिति ने इसके लिए डीआईओएस की पूर्व अनुमति नहीं ली थी। कोर्ट ने निरीक्षक के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि राधा रायजादा केस के फैसले के अनुपालन में प्रक्रिया अपनाकर की गई नियुक्ति के पूर्व अनुमति लेना जरूरी नहीं है। याची की नियुक्ति विज्ञापन की चयन प्रक्रिया अपना कर नियमानुसार की गई थी, जिसे निरस्त करना कठिनाई निवारण आदेश 1981 का उल्लंघन है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने राकेश कुमार शर्मा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। दरअसल, विद्यालय में एक अध्यापक की पदोन्नति हुई थी। इससे रिक्त हुई जगह पर नियमित नियुक्ति होने तक याची की नियुक्ति की गई। पद रिक्त होने की सूचना 15 जुलाई 97 को जिला विद्यालय निरीक्षक को दी गई।
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22 सितंबर 97 को दो अखबारों में विज्ञापन देकर चयन समिति गठित की गई। पांच अक्तूबर 1997 को नियुक्ति कर निरीक्षक को सूचित किया गया। लेकिन निरीक्षक ने 15 मार्च 99 को नियुक्ति निरस्त कर दी। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से याची कार्यरत रहा और नियमित वेतन भुगतान होता रहा। कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक वाराणसी के आदेश को अवैध करार देते हुए याची की सेवा नियमित करने का निर्देश दिया है।