प्रयागराज : शृंग्वेरपुर में प्रभु श्रीराम पर आधारित सांस्कृतिक केंद्र की डिजाइन तैयार, यूपीपीसीएल को निर्माण क
महाकुंभ से पहले निषादराज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र के जरिए प्रभु राम के आदर्शों को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने का काम शुरू हो जाएगा। देश का यह पहला सांस्कृतिक केंद्र होगा, जिसमें सिर्फ राम की संस्कृति प्रदर्शित की जाएगी।
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प्रभु श्रीराम और निषादराज के मिलन की धरा शृंग्वेरपुर धाम में भगवान श्रीराम पर आधारित सांस्कृतिक केंद्र की डिजाइन तैयार कर ली गई है। केंद्र के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को दी गई है। डीएम संजय कुमार खत्री बृहस्पतिवार को अफसरों के साथ प्रस्तावित स्थल पहुंचे। उन्होंने कार्यदायी संस्था को भूमि हस्तांतरित करने और निर्माण आरंभ कराने का निर्देश दिया। अफसरों ने डीएम को सांस्कृतिक केंद्र का नक्शा भी दिखाया।
महाकुंभ से पहले निषादराज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र के जरिए प्रभु राम के आदर्शों को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने का काम शुरू हो जाएगा। देश का यह पहला सांस्कृतिक केंद्र होगा, जिसमें सिर्फ राम की संस्कृति प्रदर्शित की जाएगी। इस केंद्र को राममय बनाने का काम संस्कृति विभाग की देखरेख में कराया जाएगा। इसमें रामायण वीथिका भी होगी और श्रीराम पुस्तकालय भी स्थापित होगा।
वन गमन के समय पहला पड़ाव था श्रृंगवेरपुर
पौराणिक मान्यता है कि कभी भगवान राम का वन गमन के दौरान अयोध्या से सीता और लक्ष्मण के साथ निकलने के बाद पहला पड़ाव शृंग्वेरपुर में था। मान्यता है कि भगवान राम ने शृंग्वेरपुर धाम में ही सीता और लक्ष्मण के साथ रात बिताई थी। इतना ही नहीं निषादराज का आतिथ्य स्वीकार करते हुए उन्हें गले से लगाकर छुआछूत का भेद मिटाते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया था।
अब उसी धरती को योगी आदित्यनाथ सरकार राम के सांस्कृतिक वैभव के रूप में विश्व पटल पर प्रदर्शित करने जा रही है। यही वजह है कि महाकुंभ-2025 से पहले शृंग्वेरपुर धाम को आध्यात्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन की मिसाल के रूप में प्रस्तुत करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत तीन एकड़ क्षेत्रफल में निषादराज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण कराने की योजना को हरी झंडी दे दी गई है।
इस अत्याधुनिक सांस्कृतिक केंद्र में सत्संग भवन और सुविधाओं से युक्त प्रेक्षागृह के निर्माण की जिम्मेदारी यूपीपीसीएल को दी गई है। यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर राजेश शर्मा ने डीएम को केंद्र का नक्शा दिखाया।
शासन को भेजी गई संस्कृति विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शृंग्वेरपुर धाम वह भूमि है, जहां पर मां गंगा के तट पर माता शांता और शृंगी ऋषि की तपोभूमि स्थित है। कहा गया है कि त्रेता युग में पुत्र प्राप्ति की इच्छा से महाराजा दशरथ ने यहां शृंगी ऋषि के आश्रम में महायज्ञ किया था। इस यज्ञ के बाद ही दशरथ को भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न नामक चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी।
शृंग्वेरपुर धाम में लगने वाले मेले और लोकोत्सव
-राष्ट्रीय रामायण मेला, कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक उत्सव
-आषाढ़ सप्तमी पर तीन दिवसीय मेला
-प्रत्येक पूर्णिमा व अमावस्या का मेला
-हर शुक्रवार, सोमवार का मेला
-नवरात्रि का मेला
प्रभु श्रीराम की संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए निषादराज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र की डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है। नक्शा कार्यदायी संस्था की ओर से प्रस्तुत किया गया है। भूमि उपलब्ध हो गई है। जल्द ही निर्माण आरंभ करा दिया जाएगा। - गुलाम सरवर, क्षेत्रीय पांडुलिपि अधिकारी