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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Dala Chhath festival: lamps of faith lit on the altars of wishes, worship of Sun God on the ghats of Ganga-Yam

डाला छठ पर्व : कामना की वेदियों पर जले आस्था के दीप, संगम सहित गंगा-यमुना के घाटों पर सूर्यदेव की आराधना

Sat, 18 Nov 2023 06:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 Nov 2023 06:24 PM IST
सार

सूर्योपासना के लिए शाम को संगम पर व्रतियों और उनके परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी। एक तरफ तटों पर वेदियां बनाई जाती रहीं और दूसरी ओर स्नान के बाद षष्ठी माता के गीत गाए जाते रहे। उन्हीं रोली, अक्षत, चंदन के टीके लगाकर दीप भी जलाए जाते रहे।

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Dala Chhath festival: lamps of faith lit on the altars of wishes, worship of Sun God on the ghats of Ganga-Yam
डाला छठ पर खरीदारी करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संगम के अलावा गंगा-यमुना के तटों पर कामना की वेदियों पर शनिवार की शाम आस्था के दीप अनंत उपहारों की मानिंद जगमगा उठे। वेदियों पर दीप जलाकर पुत्र प्राप्ति, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन के लिए भगवान सूर्य की आराधना की गई। डुबकी लगाने के बाद घरों पर खरना की रस्म पूरी कर निर्जला व्रत की शुरुआत हो गई। रविवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को षष्ठी व्रत का प्रथम अर्घ्य दिया जाएगा।

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सूर्योपासना के लिए शाम को संगम पर व्रतियों और उनके परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी। एक तरफ तटों पर वेदियां बनाई जाती रहीं और दूसरी ओर स्नान के बाद षष्ठी माता के गीत गाए जाते रहे। उन्हीं रोली, अक्षत, चंदन के टीके लगाकर दीप भी जलाए जाते रहे। परिवार के सदस्यों के साथ सविधि पूजा के बाद भगवान सूर्य का व्रतियों ने आह्वान किया। इसके बाद घरों पर पहुंचकर खीर खाकर खरना किया।

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खरना के साथ ही निर्जला व्रत की शुरुआत हुई। छठ मइया की आराधना के गीतों के साथ घर-घर में भक्तिमय वातावरण बन गया। वीआईपी घाट पर बहू, बेटियों के साथ वेदी पूजन के लिए पहुंचीं सिविल लाइंस की मनोरमा तिवारी बताती हैं कि छठ मइया से जो भी मांगा जाता है, वह पूरा कर देती हैं। व्रत का उनका यह 20वां वर्ष है। मन की शांति के लिए वह इस व्रत को धारण करती हैं।
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इसी तरह हिम्मतगंज की रेणु सिंह भी इस व्रत को लेकर आस्था और विश्वास से भरी नजर आईं। वह कहती हैं कि मां की कृपा से ही उनके तीनों पुत्र बड़े पदों पर पहुंच गए। यह व्रत जीवन में ऊर्जा के संचार के साथ ही हर तरह की कामनाओं को पूरा करने वाला है। छठ माता अपने भक्तों की प्रार्थना जरूर सुनती हैं। रेणु सिंह की ही तरह आस्था भाव से भरे तमाम व्रतियों के घरों में षष्ठी माता की पूजा के लिए सौभाग्य का दउरा सजाने में परिजन जुट गए हैं।


रविवार की दोपहर बाद से ही बाजे गाजे के साथ व्रतियों के परिजन पूजा सामग्री से भरा दउरा या सूप सिर पर उठाकर गंगा तटों पर पहुंचेंगे। वहां वेदियों पर अखंडा दीप जलाकर गन्ने के मंडप सजाए जाएंगे। इसके बाद घर-परिवार से लेकर समाज तक के मंगल की कामना की जाएगी। इसके साथ ही डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

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