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Prayagraj : टीईटी की फर्जी वेबसाइट को साइबर पुलिस ने कराया बंद, शिक्षा सेवा चयन आयोग ने दर्ज कराई थी एफआईआर

Sat, 28 Mar 2026 05:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 28 Mar 2026 05:24 PM IST
सार

यूपी टीईटी-2026 के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। साइबर पुलिस ने फर्जी वेबसाइट को ब्लॉक करा दिया है। हालांकि, इसमें किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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Cyber police shut down fake TET website, FIR lodged by Education Service Selection Commission
फर्जी वेबसाइट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी टीईटी-2026 के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। साइबर पुलिस ने फर्जी वेबसाइट को ब्लॉक करा दिया है। हालांकि, इसमें किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस जांच में पता चला कि फर्जी uptet2026.in वेबसाइट चलाने के लिए लिथुआनिया देश की एक कंपनी से डोमेन खरीदा गया था।

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जानकारी होते ही साइबर पुलिस ने कंपनी से ई-मेल के माध्यम से संपर्क कर वेबसाइट बंद करने की गुजारिश की। वहीं, अब उक्त फर्जी वेबसाइट को ब्लॉक करा दिया गया है। उक्त लिंक पर क्लिक करने पर एरर का संदेश आ रहा है।
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गौरतलब है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग के उपसचिव संजय कुमार सिंह ने पुलिस को बताया कि आयोग की ओर से 20 मार्च को यूपी टीईटी-2026 का आधिकारिक विज्ञापन जारी किया गया था, जिसके अनुसार आवेदन प्रक्रिया 27 मार्च से शुरू होनी है। इसी बीच किसी अज्ञात ने यूपी टीईटी-2026 के नाम से एक फर्जी वेबसाइट तैयार कर दी। शिकायत पर कर्नलगंज थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।

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पायलट ट्रेनिंग के नाम पर छात्र से 14 लाख की ठगी

सिविल लाइंस के रहने वाले रोहित वर्मा ने बेटे रौनक वर्मा को पायलट का प्रशिक्षण दिलाने के नाम पर एक बड़ी कंपनी द्वारा ठगी किए जाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर जाटी ढिल्लो, राम कृष्णन अय्यर, रणदीप पनाग और समर सिंह माली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सरोजिनी नायडू मार्ग स्थित सरस्वती अपार्टमेंट में रहने वाले रोहित वर्मा के अनुसार उनके बेटे रौनक वर्मा ने छह अगस्त 2019 को पायलट प्रशिक्षण देने वाली संस्था गाटी में दाखिला लिया था। इसके लिए करीब 14 लाख रुपये फीस के रूप में जमा किए गए, जिसमें आठ लाख रुपये बैंक के माध्यम से और शेष नकद दिए गए थे।

संस्थान ने 185 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग और उसके बाद कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस दिलाने का आश्वासन दिया था। आरोप है कि तय एयरक्राफ्ट की जगह छात्रों को दूसरे विमान से प्रशिक्षण देते हुए फरवरी 2024 में अचानक प्रशिक्षण रोक दिया गया। पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने संस्थान से ट्रेनिंग पूरी करने या फीस वापस करने की मांग की तो लगातार टालमटोल किया गया। संस्थान के डायरेक्टर और अन्य जिम्मेदार लोगों से संपर्क करने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि फोन करने पर अभद्र व्यवहार कर धमकी दी गई। रोहित वर्मा ने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से सुनियोजित धोखाधड़ी है, जिसमें छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। उनका कहना है कि उनके बेटे का कॅरिअर अधर में लटक गया है।

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