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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   There are also numerous cases against Dokbnsl

डॉ.बंसल के खिलाफ भी हैं ढेरों मुकदमे

Sun, 13 Sep 2015 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 13 Sep 2015 02:00 AM IST
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इलाहाबाद। डॉ.एके बंसल की गाड़ी पर गोली-बम से हमले की जांच कर रही जार्जटाऊन थाने की पुलिस शनिवार को भी सुबूतों की तलाश में जुटी रही। पुलिस जांच के दौरान यह तथ्य भी ध्यान में रख रही है कि हमले के आरोपी बिल्डर संजीव अग्रवाल पर इससे पहले कोई आपराधिक केस नहीं था जबकि डॉ.बंसल तो हत्या, गैर इरादतन कत्ल, इलाज में लापरवाही से मौत, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, जालसाजी, धोखाधड़ी और दलित उत्पीड़न जैसे करीब एक दर्जन केस के आरोपी हैं। हालांकि यह भी सच है कि अब तक उन्हें किसी मुकदमे में जेल नहीं जाना पडा है।
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पिछले शुक्रवार की रात अपने निवास के पास इनोवा पर हमले में बचने के बाद बिल्डर संजीव अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर लिखाने वाले जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ.एक बंसल के खिलाफ भी ढेरों मुकदमे हैँ। थानाध्यक्ष जार्जटाउन दीपक पांडेय के मुताबिक, गाड़ी पर हमले की जांच के दौरान पता चला कि पिछले एक दशक में डॉ.बंसल के खिलाफ केवल कीडगंज थाने में ही एक दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हुए। कीडगंज थाने के रेकार्ड के अनुसार, वर्ष 2008 में डॉ.बंसल के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, हेराफेरी, धमकाने का केस लिखा गया। अगले साल यानी 2009 में उन पर तीन मुकदमे कीडगंज थाने में लिखे गए।
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उस साल पहला मुकदमा डकैती, धमकी, दलित उत्पीड़न, दूसरा मुकदमा धोखाधड़ी, हेराफेरी और तीसरा मारपीट, गालीगलौज तथा लापरवाही से मौत का था। फिर 2012 डॉ.बंसल और उनके स्टाफ के खिलाफ चार केस लिखे गए। इसमें सबसे प्रमुख घटना रही हॉस्पिटल में जांच के लिए पहुंची आयकर विभाग की टीम पर हमले की। आयकर अफसरों को पुलिस बल ने आकर बचाया। हमले के बाद पैरा मिलेट्री फोर्स की मदद से वहां कार्रवाई की गई थी।
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उस घटना की एफआईआर के कुछ दिनों बाद प्रेस कांफ्रेस से निकलते वक्त पुलिस ने डॉ.बंसल को हिरासत में लिया था मगर कई घंटे बाद रिहा कर दिया गया।

2012 में ही उनके खिलाफ जबरन धन वसूली का केस लिखा गया। 2013 में भी डॉ.बंसल और उनके स्टाफ के खिलाफ कीडगंज थाने में दो केस लिखे गए। एक मारपीट, गालीगलौज, एससी-एसटी एक्ट और दूसरा गैरइरादतन हत्या का। पिछले साल डॉ.बंसल के खिलाफ कारोबारी जवाहरलाल केसरवानी की हत्या का केस लिखा गया हालांकि बाद में विवेचना के दौरान धारा 304ए यानी लापरवाही से मौत में तब्दील कर दी गई।

यह शायद डॉ.बंसल के प्रभाव का ही असर है कि इनमें से शुरुआती कुछ मुकदमे अब खत्म हो चुके हैं। आयकर अफसरों पर हमले वाली संगीन घटना में भी कई दिन बाद उन्हें हिरासत में लिया गया मगर कुछ ही घंटे बाद वे बरी हो गए। इतने मुकदमों के बावजूद डॉ.बंसल को कभी जेल नहीं जाना पड़ा। पैसों के चक्कर में मरीजों के शव रोकने पर अक्सर अस्पताल में मारपीट और हंगामा होता रहा है। उन पर लिखे ज्यादातर मुकदमे हॉस्पिटल से ही जुड़े हैं पर एक मुकदमा कारोबारी ने भी धोखाधड़ी का लिखाया था।

करीब एक साल पहले बलुआघाट में कारोबारी जवाहरलाल केसरवानी को बदमाशों ने घर के पास गोली मारकर नगदी लूट की कोशिश की थी। वह बहादुरगंज स्थित अपनी दुकान से घर लौट रहे थे तभी बदमाशों ने हमला किया। उन्हें जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती किया गया जहां डॉक्टरों ने कहा कि उनके शरीर में गोली नही हैं मगर मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम में डॉक्टरों को गोली मिली तो परिजन और व्यापारी भड़क गए।


शव रखकर चक्काजाम भी किया। तब कीडगंज थाने में डॉ.बंसल के खिलाफ 302 के तहत कत्ल का केस लिखा गया। साल भर हो रहे हैं। धारा बदल दी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मृतक जवाहर के भाई आनंद केसरवानी ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि डॉ.बंसल धनी और नेताओं तक पहुंच वाले हैं इसलिए पुलिस ने उन पर अब तक हाथ नहीं डाला और जांच की बात की जा रही है। अब इस मुकदमे को विशेष जांच शाखा में भेज दिया गया है।
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