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खरी खोटी सुना रहे अधिवक्ताओं की चिरौरी करती रही पुलिस

Fri, 11 May 2018 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 11 May 2018 01:26 AM IST
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The police, who had heard the truth, heard the lies
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
मृत अधिवक्ता के परिजनों को तत्काल मुआवजा एवं हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर अधिवक्ता शव को लेकर मेडिकल कॉलेज तिराहे पर पहुंच गए और वहां जाम लगा दिया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने पुलिस, प्रशासन के साथ ही सरकार के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। वहीं, पुलिस इस पूरे घटनाक्रम के दौरान करीब चार घंटे तक अधिवक्ताओं की चिरौरी करती रही। अधिवक्ता पुलिस के आला अफसरों को खरी-खोटी सुनाते रहे, लेकिन पुलिस विनयवत होकर सुनती रही।
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अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव को गोली मारे जाने के तुरंत बाद पुलिस ने उसे एसआरएन अस्पताल भिजवा दिया। डॉक्टरों ने उन्हें आक्सीजन देने की कोशिश भी की, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ और मृत घोषित कर दिया गया। बार के मौजूदा एवं पूर्व पदाधिकारियों के अलावा सैकड़ों की संख्या में मौजूद अधिवक्ताओं ने शव को चौराहे पर रखकर चक्का जाम कर दिया। आक्रोशित अधिवक्ता पहले मौके पर मुख्य सचिव एवं डीजीपी को बुलाने की मांग की मांग कर रहे थे। कुछ ़देर में ही मौके पर सीडीओ संग आईजी रेंज रमित शर्मा अधिवक्ताओं को समझाने वहां पहुंचे लेकिन अफसरों को देखते ही अधिवक्ताओं का पारा चढ़ गया। उन्होंने अफसरों को खरी-खोटी सुनानी शुरूकर दी। अधिवक्ता घटना के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताते हुए उसे बुरी तरह कोस रहे थे। इन सबके बीच आईजी अधिवक्ताओं को मनाने की कोशिश कर रहे थे।
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लेकिन अधिवक्ता अपनी मांग पर अड़े हुए थे। अधिवक्ता पचास लाख मुआवजा, परिजनों की नौकरी के तत्काल एलान की मांग कर रहे थे, लेकिन सीडीओ ने इस पर असमर्थता जताई। अधिवक्ता इस पर फिर बिफर उठे और हूटिंग करते हुए दोनों अफसरों को बैरंग लौटा दिया। अधिवक्ताओं के तल्ख रवैये के बावजूद दोनों अफसर पसीना पोछते करीब वहां तीन घंटे तक खड़े रहे। पूरे पुलिस बल को भी संयम बरतने की नसीहत दी गई थी। उसके बाद मौके पर काफी देर तक सीडीओ, आईजी अलग हटकर मोबाइल पर बात करते रहे। करीब दो बजे उन्होेंने बार पदाधिकारियों से बीस लाख मुआवजा की हामी भरी तब जाकर अधिवक्ता शव पुलिस को सौँपने के लिए राजी हुए। अधिवक्ताओं से शव लेकर पुलिस सीधे पोस्टमार्टम हाउस पहुंची, जहां पोस्टमार्टम कराया गया।
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अधिवक्ता की मौत के बाद अधिवक्ताओं में आक्रोश अधिक न फैले इसके लिए पुलिस काफी तेजी दिखा रही थी। घटना स्थल से महज दस मिनट के भीतर पुलिस अधिवक्ता को लेकर अस्पताल पहुंच गई। उनके मरने की पुष्टि होते ही पुलिस शव को कब्जे में लेकर चीरघर ले जाने लगी, लेकिन इसी बीच दो दर्जन से अधिक अधिवक्ता वहां पहुंच गए और उन्होंने पुलिस के कब्जे से शव को छीनकर उसे लेकर मेडिकल कॉलेज तिराहा पहुंच गए। वहां शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया।  

मेडिकल अस्पताल तिराहा के आसपास का पूरा इलाका करीब चार घंटे तक पूरी तरह वकीलों के हवाले रहा। जैसा मन हुआ उन्होंने वैसा बर्ताव वहां मौजूद लोगों के साथ किया। हालांकि अधिवक्ताओं के आक्रामक रवैये को देखते हुए पुलिस ने हनुमान मंदिर चौराहे से मेडिकल कॉलेज चौराहा तक का पूरा इलाका सील कर दिया था। इस रास्ते पर किसी वाहन को आने नहीं दिया जा रहा था, लेकिन जो भी वाहन चालक उधर की तरफ पहुंच रहा था वह अधिवक्ताओं के दुर्व्यवहार का शिकार हो रहा था। वहां मौजूद कुछ लोगों ने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें उतारने की कोशिश की जिस पर आक्रोशित अधिवक्ताओं ने उनके मोबाइल फोन पटककर तोड़ डाले। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक छीनाझपटी के बीच अधिवक्ताओं ने एसएसपी के पीआरओ का फोन भी छीन लिया और उनकेसाथ भी धक्का-मुक्की करने की कोशिश की लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच-बचाव के बाद किसी तरह मामला संभाला।


मेडिकल तिराहे पर चक्काजाम के चलते एसआरएन अस्पताल में इलाज के लिए जाने वाले मरीजों को अस्पताल तक पैदल चलकर ही पहुंचना पड़ा। किसी भी वाहन को अधिवक्ता भीतर जाने नहीं दे रहे थे। हमीरपुर से आई एक 65 साल की महिला पथरी का इलाज कराने यहां पहुंची थी। उसकेपरिजनों ने मिन्नतें की लेकिन उसके वाहन को नहीं जाने दिया गया। आखिरकार उस महिला को पैदल ही अस्पताल जाना पडा हालांकि अधिवक्ता एंबुलेंस को जाने का रास्ता देते रहे। चक्का जाम के दौरान पांच एंबुलेंस आईं जिनमें मरीज थे। उन सबके लिए अधिवक्ताओं ने रास्ता खाली कर दिया।



पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया कि अधिवक्ता की हत्या में 315 बोर के तमंचे का ही इस्तेमाल किया गया। गोली इतने करीब से मारी गई कि शरीर में गन पाउडर एवं ब्लैकिंग के निशान भी साफ तौर पर मिले। गोली दाहिनी कनपटी पर बिलकुल सटाकर मारी गई थी, जो सिर को भेदते हुए बायीं तरफ भेजे से बाहर निकल गई। गोली करीब डेढ़ सेमी घेरे की जगह बनाते हुए घुसी थी।   
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