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फिरौती के लिए बेरहमी से पीटा गया था शुभम
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Mon, 22 May 2017 01:45 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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दो लाख की फिरौती के लिए अपहरणकर्ता शुभम को नंगा करके उसकी पीठ पर नीम की पतली डंडी से रोजाना पिटाई करते थे। कई बार तो शुभम के रोने की आवाज उसके पिता दिनेश को मोबाइल पर भी सुनाईं। रो - रो कर शुभम अपने पिता से कहता था कि कैसे भी करो, मुझे इन अंकल से छुड़ा ले जाओ। मोबाइल बच्चे की आवाज सुनकर दिनेश कई बार भावुक हुआ और अकेले ही फिरौती की रकम अपहरणकर्ताओं को देने का मन बनाया। लेकिन परिवार वालों ने अकेले जाने से रोका। आसपास के लोगों की सलाह पर पुलिस की मदद ली। पुलिस ने भी बच्चे को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराने में काफी देरी की।
पुलिस की कहानी के अनुसार रविवार दोपहर अगवा किए आठ साल के शुभम को क्राइम ब्रांच ने अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुडा लिया। अपहरण करने वाले तीनों बदमाशों को बुलेरो तथा हथियारों सहित दबोच लिया। अपहरणकर्ता क्राइम ब्रांच को मोबाइल पर फिरौती के लिए बातचीत करके बार-बार फोन स्विच आफ कर लोकेशन बदल कर उलझाते रहे।
एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि अपहरणकर्ताओं से फिरौती को लेकर कई दिन तक बात चल रही थी।
रविवार दोपहर करीब 12.15 बजे मंसूराबाद बाईुपास पुरवा से अपहरणकर्ता जितेंद्र ने बुलेरो कार में अपह्त शुभम को बैठाकर 300 मीटर दूर हाईवे के पास रणजीत के साथ फिरौती की रकम लेने के लिए भेजा। जिनको शुभम के पिता दिनेश ने 100-100 के नोटों की 10 गड़्डी बैग में रखकर दीं। रणजीत बैग लेकर बुलेरो में बैठने लगा, वहां पर पहले से तैयार क्राइम ब्रांच टीम ने उसे घेर लिया। उसी समय तीन सौ मीटर दूर से जितेंद्र ने पुलिस पर फायरिंग की। पुलिस ने भी जवाबी फायर किए और तीनों को दबोच लिया।
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थाना नवाबगंज के महेशपुर गांव का आठ वर्षीय शुभम चार मई की रात अपने दादा इंद्र बहादुर पटेल के साथ महेशपुर चौपटावापुर तुलसीपुर गांव में बरात में गया था। रात को बारात में बाबा के साथ सो रहे शुभम को सराय गोपाल का रहने वाला जितेंद्र और जोगीपुर का रहने वाला रोशन लाल उठा ले गया। सुबह हुआ तो महेशपुर गांव में शुभम को तलाशा । आसपास के गांवों में बच्चे के फोटो सहित पोस्टर चिपकाए गए। तलाशने पर बच्चा नहीं मिला तो गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। अपहरण की पुष्टि होने पर अज्ञात के खिलाफ थाना नवाबगंज में अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया।
अपहरणकर्ता बच्चे को कुछ ही दूरी पर खड़ी बोलेरो में बैठाकर जितेंद्र के घर ले गए। घर में मां उर्मिला ने विरोध किया तो वह उसे ट्रेन से पहले अंबाला ले गए। लोकेशन पता चलती गईं तो कभी गुजरात और कभी मुंबई ले गए। बाद में फिरौती तय होने पर इलाहाबाद ले आए।
थाना सोराव के सराय गोपाल निवासी जितेंद्र ने 26 मई 2016 को अपने दोस्त दूधनाथ मौर्य की बुलेरो हड़पने के लिए हत्या कर शरीर के टुकड़े करके वाराणसी बाईपास पर फेंक दिया था। वह पिछले महीने ही जमानत पर रिहा हुआ था। जितेंद्र पूर्व में नलकूप आपरेटर रहा है और इस समय बर्खास्त है। फिर से आपरेटर की नौकरी पाने को एक लाख रुपये जुटाने को यह अपहरण किया। दूसरे आरोपी रोशन के खिलाफ थाना मऊआइमा में धारा 392,/411,419,420,467 तथा 468 में मुकदमा दर्ज है। तीसरे आरोपी रणजीत के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है।
आठ साल के बच्चे की सकुशल बरामदगी और तीनों आरोपियों की गिरफ्तारीपर एडीजीपी एसएन साबत ने क्राइम ब्रांच टीम को 10 हजार का इनाम दिया है। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने भी पांच हजार का इनाम दिया है।
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पुलिस की कहानी के अनुसार रविवार दोपहर अगवा किए आठ साल के शुभम को क्राइम ब्रांच ने अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुडा लिया। अपहरण करने वाले तीनों बदमाशों को बुलेरो तथा हथियारों सहित दबोच लिया। अपहरणकर्ता क्राइम ब्रांच को मोबाइल पर फिरौती के लिए बातचीत करके बार-बार फोन स्विच आफ कर लोकेशन बदल कर उलझाते रहे।
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एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि अपहरणकर्ताओं से फिरौती को लेकर कई दिन तक बात चल रही थी।
रविवार दोपहर करीब 12.15 बजे मंसूराबाद बाईुपास पुरवा से अपहरणकर्ता जितेंद्र ने बुलेरो कार में अपह्त शुभम को बैठाकर 300 मीटर दूर हाईवे के पास रणजीत के साथ फिरौती की रकम लेने के लिए भेजा। जिनको शुभम के पिता दिनेश ने 100-100 के नोटों की 10 गड़्डी बैग में रखकर दीं। रणजीत बैग लेकर बुलेरो में बैठने लगा, वहां पर पहले से तैयार क्राइम ब्रांच टीम ने उसे घेर लिया। उसी समय तीन सौ मीटर दूर से जितेंद्र ने पुलिस पर फायरिंग की। पुलिस ने भी जवाबी फायर किए और तीनों को दबोच लिया।
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थाना नवाबगंज के महेशपुर गांव का आठ वर्षीय शुभम चार मई की रात अपने दादा इंद्र बहादुर पटेल के साथ महेशपुर चौपटावापुर तुलसीपुर गांव में बरात में गया था। रात को बारात में बाबा के साथ सो रहे शुभम को सराय गोपाल का रहने वाला जितेंद्र और जोगीपुर का रहने वाला रोशन लाल उठा ले गया। सुबह हुआ तो महेशपुर गांव में शुभम को तलाशा । आसपास के गांवों में बच्चे के फोटो सहित पोस्टर चिपकाए गए। तलाशने पर बच्चा नहीं मिला तो गुमशुदी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। अपहरण की पुष्टि होने पर अज्ञात के खिलाफ थाना नवाबगंज में अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया।
अपहरणकर्ता बच्चे को कुछ ही दूरी पर खड़ी बोलेरो में बैठाकर जितेंद्र के घर ले गए। घर में मां उर्मिला ने विरोध किया तो वह उसे ट्रेन से पहले अंबाला ले गए। लोकेशन पता चलती गईं तो कभी गुजरात और कभी मुंबई ले गए। बाद में फिरौती तय होने पर इलाहाबाद ले आए।
थाना सोराव के सराय गोपाल निवासी जितेंद्र ने 26 मई 2016 को अपने दोस्त दूधनाथ मौर्य की बुलेरो हड़पने के लिए हत्या कर शरीर के टुकड़े करके वाराणसी बाईपास पर फेंक दिया था। वह पिछले महीने ही जमानत पर रिहा हुआ था। जितेंद्र पूर्व में नलकूप आपरेटर रहा है और इस समय बर्खास्त है। फिर से आपरेटर की नौकरी पाने को एक लाख रुपये जुटाने को यह अपहरण किया। दूसरे आरोपी रोशन के खिलाफ थाना मऊआइमा में धारा 392,/411,419,420,467 तथा 468 में मुकदमा दर्ज है। तीसरे आरोपी रणजीत के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है।
आठ साल के बच्चे की सकुशल बरामदगी और तीनों आरोपियों की गिरफ्तारीपर एडीजीपी एसएन साबत ने क्राइम ब्रांच टीम को 10 हजार का इनाम दिया है। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने भी पांच हजार का इनाम दिया है।