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जिसे कहा संदिग्ध विदेशी, वह तो निकला सन्यासी

Sun, 31 Jan 2016 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद Updated Sun, 31 Jan 2016 01:20 AM IST
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Said the suspected alien , he turned hermit

माघ मेला के खाक चौक इलाके में शुक्रवार को जिस साधु वेशधारी युवक को ऊलजलूल हरकतों के कारण हिरासत में लिए जाने पर संदिग्ध विदेशी होने का हल्ला मचा था, वह दरअसल बाल सन्यासी है। पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे रिहा कर दिया। पुलिस अफसरों का क हना है कि इस तरह तो रोज ही शक होने पर कुछ लोगों से पूछताछ की जाती है। ऐसे मामलों को बेवजह तूल नहीं देना चाहिए।

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साधुवेश धारी लगभग 23 वर्षीय युवक को शुक्रवार दोपहर एक शिविर में घुसते वक्त शोर मचने पर लोगों ने पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया। उसके हुलिए से हल्ला मच गया कि संदिग्ध विदेशी पकड़ा गया है। खाकचौक थानाध्यक्ष अशोक दुबे के मुताबिक, उन्होंने युवक को थाने लाकर बात की तो पता चला कि वह कोई संदिग्ध अपराधी नहीं बल्कि बाल सन्यासी है। इस सन्यासी ने बताया कि उसकी मां मीरा अरोड़ा पंजाबी हैं जबकि पिता ब्राजील में क्रिश्चियन। करीब 25 साल पहले उसके नाना कारोबार के लिए ब्राजील चले गए थे। वहीं मां मीरा ने हेनरिक पॉल से शादी कर ली थी। करीब दस साल पहले पिता ने उसकी मां को छोड़ दिया। 

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मां उसे लेकर पंजाब आ गई थी। यहां उसे जालंधर में नागाओं के आश्रम में छोड़कर मां चली गई। वह दो-तीन बार मां से मिलने ब्राजील गया। इधर चार साल से वह मां से नहीं मिला। पहले उसका नाम स्टीफन था। बाबा ने उसका नाम पहले ज्ञानदास फिर कृष्णादास रख दिया। लोग उसे कृष्णा कहकर बुलाने लगे। 2013 के महाकुंभ में वह इलाहाबाद आ गया था। तब से वह नैनी और औद्योगिक क्षेत्र में मंदिरों और आश्रमों में ठहरता या तीर्थयात्रा पर निकल जाता। नैनी मे्ं तमाम लोग उसे जानने लगे। 

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उसे अपने घर पर भी शरण देते। दो माह पहले वह नासिक कुंभ में गया तो वहां नागा बाबाओं के सानिध्य में नशीले पदार्थ के सेवन से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। बस तभी से वह ऐसी हरकत करने लगा जो लोगों को अजीब लगती हैं। छानबीन में पता चला कि उसने कभी किसी शिविर या आश्रम में चोरी नहीं की। जांच के बाद सन्यासी कृष्णादास को पुलिस ने रिहा कर दिया। थानाध्यक्ष अशोक दुबे के मुताबिक, सन्यासी को लेकर जबरन हौव्वा बना दिया गया। 

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