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सीबीआई के कब्जे में भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 02 Feb 2018 01:04 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सीबीआई की फोरेंसिक टीम ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के विभिन्न विभागों के कंप्यूटरों में फीड भर्ती परीक्षाओं से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। इसके लिए सीबीआई ने डिजिटल इंटेलिजेंस के तहत आयोग में फोरेंसिक रिकवरी ऑफ एविडेंस डिवाइस (फ्रेड) मशीनें लगा दी हैं। सीबीआई ने आयोग में चार फ्रेड मशीनें लगाई हैं, जो आयोग के गोपनीय एवं अन्य विभागों में रखे कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क को स्कैन कर रही हैं। हार्ड डिस्क में स्टोर सभी डाटा फ्रेड मशीन के जरिये सीबीआई के कब्जे में आ गए हैं।
सीबीआई जांच के इस तरीके से आयोग में हड़कंप की स्थिति है। अयोग के कंप्यूटरों में फीड सभी डाटा फ्रेड मशीनों में एकत्रित किए जाने के बाद इससे कोई छेड़छाड़ की जा सकेगी। अगर कोई ऐसा करता है तो पकड़ा जाएगा, क्योंकि पिछले पांच वर्षों में हुईं भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी सभी सूचना फ्रेड मशीन के जरिये सीबीआई को भी मिल चुकी हैं।
सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सीबीआई संदिग्ध डाटा का अपना स्तर से विश्लेषण करेगी। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लगेगा, लेकिन डाटा के विश्लेषण के बाद भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़े कई राज सामने आ सकते हैं। अगर पहले भी कंप्यूटर में फीड डाटा से किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है तो विश्लेषण के बाद ऐसे मामले भी सामने आ जाएंगे। 24 घंटे बाद भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सभी डाटा सीबीआई को भी मिल जाएंगे और इसके बाद न तो आयोग में कामकाज प्रभावित होगा और न ही सीबीआई को डाटा इकट्ठा करने के लिए मशक्कत करनी होगी।
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- सीबीआई की टीम जब आयोग के कंप्यूटरों की फोरेंसिक जांच करने पहुंची तो वहां हड़कंप मच गया। किसी को अंदाज भी नहीं था कि सीबीआई के पास फ्रेड मशीने हैं। शुरुआत में सिस्टम सेल में काफी समय से तैनात एक कर्मचारी ने जांच का विरोध किया और सीबीआई के अफसरों से झगड़े पर आमादा हो गया लेकिन आयोग के अन्य कर्मचारियों एवं अफसरों के हस्तक्षेप करने के बाद वह पीछे हट गया।
ट्रिपलआईटी में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि कंप्यूटरों की फोरेंसिक जांच के लिए फ्रेड मशीन सबसे आधुनिक और बेहतर मशीन है। बैंक में चोरी, डकैती या किसी बड़े साइबर क्राइम में जांच एजेंसियां फ्रेड मशीन का उपयोग करती हैं। कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को फ्रेड से जोड़ दिया जाता है और इसके बाद हार्ड डिस्क में मौजूद सभी आंकड़े फ्रेड मशीन में भी इकट्ठा हो जाते हैं। फ्रेड के जरिये यह भी पता लगाया जा सकता है कि पूर्व में डाटा से किस तरह की छेड़छाड़ की गई। कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में स्टोर सभी आंकड़े फ्रेड मशीन में आने के बाद जांच एजेंसियों अपने स्तर से संदिग्ध डाटा का विश्लेषण करती हैं।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएसी) की भर्तियों में हुई धांधली की जांच करने पहुंचे सीबीआई टीम को अब तक अपना कैंप कार्यालय खोलने के लिए जगह नहीं मिली। बृहस्पतिवार को सीबीआई की फोरेंसिक टीम भी इलाहाबाद पहुंच गई लेकिन टीम को पर्याप्त संख्या में वाहन भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। सर्किट हाउस के दो कमरों में सीबीआई के अफसर और अन्य सदस्य रुके हुए हैं। जगह स्थायी न हो पाने के कारण प्रतियोगी भी सीबीआई को साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए भटक रहे हैं।
बृहस्पतिवार सुबह से ही प्रतियोगी सर्किट हाउस में इकट्ठा हो गए। सीबीआई के अफसर सर्किट हाउस के जिस कमरे में रुके हुए हैं, प्रतियोगियों ने वहीं जाकर सीबीआई को साक्ष्य दिए और सीबीआई के अफसरों ने उनके बयान दर्ज किए। इनमें कई प्रतियोगी दूसरे जिलों से भी आए हुए थे। संसाधनों की कमी के कारण साक्ष्य इकट्ठा करने, बयान दर्ज करने की प्रक्रिया काफी धीमी रही। कई प्रतियोगी साक्ष्य दिए बगैर लौट गए। सीबीआई को कैंप कार्यालय खोलने के लिए गोविंदपुर स्थित सिंचाई डाक बंगला दिखाया गया था, लेकिन जिला प्रशासन के अफसरों के साथ बैठक न हो पाने के कारण इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने जितने वाहन मांगे थे, प्रशासन ने उतने उपलब्ध नहीं कराए। इससे शुरुआती जांच भी धीमी पड़ गई है। कैंप ऑफिस के लिए जगह तय न हो पाने के कारण प्रतियोगियों को भी समझ में नहीं आ रहा कि वे अफसरों से कहां मिलें। उधर, डीएम सुहास एलवाई का कहना है कि कहीं न कहीं संवाद में कमी रह गई है। वह इलाहाबाद से बाहर है। उन्होंने फोन पर एसएसपी और एडीएम सिटी से बात की है। सीबीआई को कैंप ऑफिस के लिए जो जगह चाहिए, वह मुहैया करा दी गई है। साथ ही वाहन एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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सीबीआई जांच के इस तरीके से आयोग में हड़कंप की स्थिति है। अयोग के कंप्यूटरों में फीड सभी डाटा फ्रेड मशीनों में एकत्रित किए जाने के बाद इससे कोई छेड़छाड़ की जा सकेगी। अगर कोई ऐसा करता है तो पकड़ा जाएगा, क्योंकि पिछले पांच वर्षों में हुईं भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी सभी सूचना फ्रेड मशीन के जरिये सीबीआई को भी मिल चुकी हैं।
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सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सीबीआई संदिग्ध डाटा का अपना स्तर से विश्लेषण करेगी। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी समय लगेगा, लेकिन डाटा के विश्लेषण के बाद भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़े कई राज सामने आ सकते हैं। अगर पहले भी कंप्यूटर में फीड डाटा से किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है तो विश्लेषण के बाद ऐसे मामले भी सामने आ जाएंगे। 24 घंटे बाद भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सभी डाटा सीबीआई को भी मिल जाएंगे और इसके बाद न तो आयोग में कामकाज प्रभावित होगा और न ही सीबीआई को डाटा इकट्ठा करने के लिए मशक्कत करनी होगी।
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- सीबीआई की टीम जब आयोग के कंप्यूटरों की फोरेंसिक जांच करने पहुंची तो वहां हड़कंप मच गया। किसी को अंदाज भी नहीं था कि सीबीआई के पास फ्रेड मशीने हैं। शुरुआत में सिस्टम सेल में काफी समय से तैनात एक कर्मचारी ने जांच का विरोध किया और सीबीआई के अफसरों से झगड़े पर आमादा हो गया लेकिन आयोग के अन्य कर्मचारियों एवं अफसरों के हस्तक्षेप करने के बाद वह पीछे हट गया।
ट्रिपलआईटी में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि कंप्यूटरों की फोरेंसिक जांच के लिए फ्रेड मशीन सबसे आधुनिक और बेहतर मशीन है। बैंक में चोरी, डकैती या किसी बड़े साइबर क्राइम में जांच एजेंसियां फ्रेड मशीन का उपयोग करती हैं। कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को फ्रेड से जोड़ दिया जाता है और इसके बाद हार्ड डिस्क में मौजूद सभी आंकड़े फ्रेड मशीन में भी इकट्ठा हो जाते हैं। फ्रेड के जरिये यह भी पता लगाया जा सकता है कि पूर्व में डाटा से किस तरह की छेड़छाड़ की गई। कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में स्टोर सभी आंकड़े फ्रेड मशीन में आने के बाद जांच एजेंसियों अपने स्तर से संदिग्ध डाटा का विश्लेषण करती हैं।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएसी) की भर्तियों में हुई धांधली की जांच करने पहुंचे सीबीआई टीम को अब तक अपना कैंप कार्यालय खोलने के लिए जगह नहीं मिली। बृहस्पतिवार को सीबीआई की फोरेंसिक टीम भी इलाहाबाद पहुंच गई लेकिन टीम को पर्याप्त संख्या में वाहन भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। सर्किट हाउस के दो कमरों में सीबीआई के अफसर और अन्य सदस्य रुके हुए हैं। जगह स्थायी न हो पाने के कारण प्रतियोगी भी सीबीआई को साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए भटक रहे हैं।
बृहस्पतिवार सुबह से ही प्रतियोगी सर्किट हाउस में इकट्ठा हो गए। सीबीआई के अफसर सर्किट हाउस के जिस कमरे में रुके हुए हैं, प्रतियोगियों ने वहीं जाकर सीबीआई को साक्ष्य दिए और सीबीआई के अफसरों ने उनके बयान दर्ज किए। इनमें कई प्रतियोगी दूसरे जिलों से भी आए हुए थे। संसाधनों की कमी के कारण साक्ष्य इकट्ठा करने, बयान दर्ज करने की प्रक्रिया काफी धीमी रही। कई प्रतियोगी साक्ष्य दिए बगैर लौट गए। सीबीआई को कैंप कार्यालय खोलने के लिए गोविंदपुर स्थित सिंचाई डाक बंगला दिखाया गया था, लेकिन जिला प्रशासन के अफसरों के साथ बैठक न हो पाने के कारण इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने जितने वाहन मांगे थे, प्रशासन ने उतने उपलब्ध नहीं कराए। इससे शुरुआती जांच भी धीमी पड़ गई है। कैंप ऑफिस के लिए जगह तय न हो पाने के कारण प्रतियोगियों को भी समझ में नहीं आ रहा कि वे अफसरों से कहां मिलें। उधर, डीएम सुहास एलवाई का कहना है कि कहीं न कहीं संवाद में कमी रह गई है। वह इलाहाबाद से बाहर है। उन्होंने फोन पर एसएसपी और एडीएम सिटी से बात की है। सीबीआई को कैंप ऑफिस के लिए जो जगह चाहिए, वह मुहैया करा दी गई है। साथ ही वाहन एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।