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संचालक के खिलाफ एक करोड़ से अधिक के गबन की एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Updated Thu, 13 Dec 2018 01:00 AM IST
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रिप्पल फर्जावाड़ा
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कोतवाली थाना क्षेत्र में बिजली घर के बगल में स्थित लेजर ग्रीन गेस्ट हाउस के पूर्व संचालक दीपेश श्रीवास्तव के खिलाफ एक करोड़ से अधिक के गबन और धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। गेस्ट हाउस की मालकिन ने कोतवाली में बुधवार को मुकदमा दर्ज कराया। आरोप है कि दीपेश ने दिसंबर 2017 के बाद गेस्ट हाउस की बुकिंग से मिलने वाला पैसा दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर कर लिया।
मेसर्स लेजर ग्रीन, विशेष खंड गोमती नगर, लखनऊ की एक पार्टनरशिप फर्म है। ज्योति श्रीवास्तव, अंकिता राज और फ्लोरल इंफोटेक की निदेशक स्मिता अग्रवाल, जो कि विशेष खंड में रहती हैं, फर्म की पार्टनर हैं। फर्म ने 2012 में केपी ट्रस्ट से 30 साल के अनुबंध पर बिजली घर के बगल में लेजर ग्रीन गेस्ट हाउस खोला था। स्टैनली रोड के दीपेश श्रीवास्तव को इसका केयरटेकर और संचालक बनाया गया था। तब से दीपेश ही गेस्ट हाउस की देख रेख कर रहा था। दिसंबर 2017 के बाद उसने लेजर ग्रीन लान के खाते में पैसा जमा करना बंद कर दिया। पूछा गया तो उसने बताया कि बुकिंग ही नहीं हो रही है।
बाद में बुकिंग के दो मामले खुल गए, जिसे दीपेश ने दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर करा दिए थे। इसके बाद जांच कराई गई। पता चला कि साल भर में 50 से अधिक बुकिंग कराई गई थी। दीपेश ने लेजर ग्रीन लान के नाम से फर्जी रसीदें भी छपवा रखी थीं। वह तमाम लोगों से नकद भी ले रहा था। जानकारी होने के बाद दीपेश को हटाकर राजरूपपुर के पीयूष श्रीवास्तव को संचालक बना दिया गया। बुधवार को फर्म की पार्टनर स्मिता अग्रवाल, ज्योति श्रीवास्तव और अंकिता राज ने कोतवाली थाने में दीपेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। उनका कहना था कि दीपेश ने एक साल के दौरान एक करोड़ से अधिक की बुकिंग की है। इंस्पेक्टर कोतवाली रवींद्र यादव ने बताया कि इस मामले में 419, 420, 467, 468 और 471 की धाराएं लगाई गई हैं। जांच शुरू कर दी गई है।
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मेसर्स लेजर ग्रीन, विशेष खंड गोमती नगर, लखनऊ की एक पार्टनरशिप फर्म है। ज्योति श्रीवास्तव, अंकिता राज और फ्लोरल इंफोटेक की निदेशक स्मिता अग्रवाल, जो कि विशेष खंड में रहती हैं, फर्म की पार्टनर हैं। फर्म ने 2012 में केपी ट्रस्ट से 30 साल के अनुबंध पर बिजली घर के बगल में लेजर ग्रीन गेस्ट हाउस खोला था। स्टैनली रोड के दीपेश श्रीवास्तव को इसका केयरटेकर और संचालक बनाया गया था। तब से दीपेश ही गेस्ट हाउस की देख रेख कर रहा था। दिसंबर 2017 के बाद उसने लेजर ग्रीन लान के खाते में पैसा जमा करना बंद कर दिया। पूछा गया तो उसने बताया कि बुकिंग ही नहीं हो रही है।
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बाद में बुकिंग के दो मामले खुल गए, जिसे दीपेश ने दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर करा दिए थे। इसके बाद जांच कराई गई। पता चला कि साल भर में 50 से अधिक बुकिंग कराई गई थी। दीपेश ने लेजर ग्रीन लान के नाम से फर्जी रसीदें भी छपवा रखी थीं। वह तमाम लोगों से नकद भी ले रहा था। जानकारी होने के बाद दीपेश को हटाकर राजरूपपुर के पीयूष श्रीवास्तव को संचालक बना दिया गया। बुधवार को फर्म की पार्टनर स्मिता अग्रवाल, ज्योति श्रीवास्तव और अंकिता राज ने कोतवाली थाने में दीपेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। उनका कहना था कि दीपेश ने एक साल के दौरान एक करोड़ से अधिक की बुकिंग की है। इंस्पेक्टर कोतवाली रवींद्र यादव ने बताया कि इस मामले में 419, 420, 467, 468 और 471 की धाराएं लगाई गई हैं। जांच शुरू कर दी गई है।
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