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गांजा तस्करी को ट्रक में बनाया गुप्त केबिन
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 11 Feb 2015 11:54 PM IST
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क्राइम ब्रांच ने नवाबगंज पुलिस की मदद से मंगलवार को गांजा लेकर जा रहे ट्रक को पकड़ा तो पुलिस अफसर भी सकते में रह गए। दरअसल, ट्रक खाली था लेकिन पुलिस ने सख्ती की तो ड्राइवर ने गुप्त केबिन खोल दिया। केबिन में ही सात कुंतल गांजा उड़ीसा से छिपाकर लाया गया था। पुलिस के हत्थे चढ़े दोनों व्यक्ति ट्रक ड्राइवर हैं। अब पुलिस टीम गांजा तस्करी से जुड़े दो लोगों की तलाश में छापे मार रही है।
एसपी क्राइम अरुण पांडेय ने बताया कि क्राइम ब्रांच प्रभारी मनोज रघुवंशी ने उपनिरीक्षक संजय सिंह, विनोद कुमार सिंह, हेडकांस्टेबल जीतेंद्र पाल सिंह, अवधेंद्र तिवारी, जुलकर नैन तथा एसओ नवाबगंज विजय कुमार सिंह के साथ घेराबंदी कर मंगलवार रात नवाबगंज में टाटा का ट्रक पकड़ा। उसे रोककर तलाशी ली गई तो ट्रक खाली था। मगर क्राइम ब्रांच को पक्की खबर थी कि उस ट्रक में गांजा की खेप आ रही है। पुलिस ने ड्राइवरों को कर्रा किया तो उन्होंने ट्रक के निचले हिस्से में बना गुप्त केबिन खोला जिसमें सात कुंतल गांजा छिपाकर रखा गया था।
इतनी गांजा की कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है। पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए दोनों ट्रक ड्राइवर हैं बाकरगंज गांव, पश्चिम शरीरा कौशाम्बी का रामकुशल सिंह उर्फ संतलाल और घसिया का पूरा गांव पश्चिम शरीरा का रामसूरत सरोज उर्फ राधेमोहन। उन दोनों ने बताया कि गांजा की खेप फतेहपुर में खखरेरू के महाराज और उसके साथियों कौशाम्बी में पश्चिम शरीरा के राकेश सिंह, जौनपुर के पिंटू सिंह ने मंगाई थी।
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जौनपुर का ही रामसहाय यादव भी इस गिरोह में शामिल है। जांच में पता चला है कि महाराज ही गैंग का मुखिया है। उसने ही यह ट्रक कुछ समय पहले खासतौर से गांजा सप्लाई के लिए रामसहाय के नाम से खरीदी थी। वह उड़ीसा से हर महीने तीन या चार बार गांजा मंगाकर जौनपुर, कौशाम्बी और फतेहपुर में बेचता रहा है। वे दोनों हर खेप में ट्रक ड्राइवरों को एक लाख रुपये और बाकी खर्चे देते थे।
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एसपी क्राइम अरुण पांडेय ने बताया कि क्राइम ब्रांच प्रभारी मनोज रघुवंशी ने उपनिरीक्षक संजय सिंह, विनोद कुमार सिंह, हेडकांस्टेबल जीतेंद्र पाल सिंह, अवधेंद्र तिवारी, जुलकर नैन तथा एसओ नवाबगंज विजय कुमार सिंह के साथ घेराबंदी कर मंगलवार रात नवाबगंज में टाटा का ट्रक पकड़ा। उसे रोककर तलाशी ली गई तो ट्रक खाली था। मगर क्राइम ब्रांच को पक्की खबर थी कि उस ट्रक में गांजा की खेप आ रही है। पुलिस ने ड्राइवरों को कर्रा किया तो उन्होंने ट्रक के निचले हिस्से में बना गुप्त केबिन खोला जिसमें सात कुंतल गांजा छिपाकर रखा गया था।
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इतनी गांजा की कीमत करीब 50 लाख रुपये आंकी गई है। पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए दोनों ट्रक ड्राइवर हैं बाकरगंज गांव, पश्चिम शरीरा कौशाम्बी का रामकुशल सिंह उर्फ संतलाल और घसिया का पूरा गांव पश्चिम शरीरा का रामसूरत सरोज उर्फ राधेमोहन। उन दोनों ने बताया कि गांजा की खेप फतेहपुर में खखरेरू के महाराज और उसके साथियों कौशाम्बी में पश्चिम शरीरा के राकेश सिंह, जौनपुर के पिंटू सिंह ने मंगाई थी।
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जौनपुर का ही रामसहाय यादव भी इस गिरोह में शामिल है। जांच में पता चला है कि महाराज ही गैंग का मुखिया है। उसने ही यह ट्रक कुछ समय पहले खासतौर से गांजा सप्लाई के लिए रामसहाय के नाम से खरीदी थी। वह उड़ीसा से हर महीने तीन या चार बार गांजा मंगाकर जौनपुर, कौशाम्बी और फतेहपुर में बेचता रहा है। वे दोनों हर खेप में ट्रक ड्राइवरों को एक लाख रुपये और बाकी खर्चे देते थे।