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गैंगस्टर के आरोपी को छोड़ने में फंसी जेल, जांच शुरू

Sun, 11 Feb 2018 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 11 Feb 2018 01:26 AM IST
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Gangster accused in leaving prisoner, Probe starts
arrested
केंद्रीय कारागार नैनी से गैंगस्टर केआरोपी को गलती से छोड़े जाने केमामले ने तूल पकड़ लिया है। शनिवार को इस मामले में मातहतों की रिपोर्ट मिलने केबाद डीआईजी जेल ने शासन केसाथ ही गैंगस्टर न्यायालय, महानिरीक्षक  जेल व सभी जिलों केडीएम, एसएसपी को सूचना भेजकर बंदी को छोड़े जाने की जानकारी दी है। जिलाधिकारी इलाहाबाद को भी पत्र भेजकर मजिस्ट्रेटी जांच के लिए डीआईजी ने कहा है। डीआईजी जेल का कहना है कि  इस मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
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    बीते 26 जनवरी को केंद्रीय कारागार नैनी से एक एनजीओ की पहल पर चार बंदियों को रिहा किया गया। बताया गया कि यह ऐसे बंदी हैं जो मामूली अपराधों में जेल में निरुद्ध थे और जुर्माना न अदा कर पाने की वजह से उनकी रिहाई नहीं हो पा रही थी। एनजीओ ने कुल 15 हजार रुपये का जुर्माना अदा कर चारों को रिहा करवाया। इनमें अरबाज खान उर्फभाईजान पुत्र सलीम खान उर्फअशोक निवासी राधामवई, थाना मऊ जिला चित्रकूट भी शामिल था। रिहाई के13 दिन बाद यानी नौ फरवरी को जेल प्रशासन को पता चला कि रिहा किए गए बंदियों में शामिल अरबाज पर चोरी केसाथ ही गैंगस्टर केतहत भी मामला दर्ज था। यह बात पता चलने केबाद जेल में हड़कंप मच गया। डीआईजी जेल बीआर वर्मा ने जेलर बालकृष्ण मिश्रा और डिप्टी जेलर अरुण कुमार कुशवाहा व अभय शुक्ला से पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी। शनिवार सुबह तीनों की ओर से जो रिपोर्ट डीआईजी जेल को दी गई, उसमें इस बात की पुष्टि थी कि आरोपी अरबाज पर गैंगस्टर का मुकदमा था। यह भी पता चला कि अरबाज एक सितंबर 2016 को जेल में लाया गया था। डीआईजी जेल ने रेडियोग्राम(इलेक्ट्रानिक संदेश) भेजकर सभी जिलों केडीएम-एसपी केसाथ महानिरीक्षक जेल व गैंगस्टर न्यायालय को बंदी को छूट जाने की सूचना दी है।
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प्रारंभिक पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, उसके  मुताबिक सजायाफ्ता रजिस्टर में इंट्री न होने की वजह से अरबाज जेल से छूटा। अफसरों के मुताबिक जेल में सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों का रजिस्टर अलग-अलग होता है। यदि आरोपी सजायाफ्ता केसाथ-साथ किसी मामले में विचाराधीन है तो सजायाफ्ता रजिस्टर में उसकेनाम केसामने इसकी इंट्री होती है। अरबाज केमामले में जेल कर्मचारियों से यहीं चूक हुई। चोरी केमामले में वह सजायाफ्ता था लेकिन इस रजिस्टर में उसकेनाम केसामने गैंगस्टर केमुकदमे में विचाराधीन होने से संबंधित कोई इंट्री नहीं थी। यही वजह रही कि उसका नाम उन बंदियों की सूची में शामिल कर दिया गया जो सजा काट चुकेथे लेकिन जुर्माना न भर पाने केकारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही थी।
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यह भी पता चला है कि जेल से रिहाई केबाद अरबाज चित्रकूट स्थित अपने घर नहीं पहुंचा। सूत्रों की मानें तो मामले की जानकारी केबाद जेल कर्मचारियों की ओर से उस एनजीओ केपदाधिकारियों से संपर्ककिया गया जिसकी पहल पर बंदियों को रिहा किया गया था। इसकेबाद पता चला कि आरोपी अरबाज रिहाई केबाद से लापता हो गया है। यह भी बताया कि गया एनजीओ ने रसूलपुर करेली स्थित अरबाज केचाचा केघर भी संपर्क किया। लेकिन वह भी उसकेबारे में कुछ बता नहीं सके।
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