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काम में ढूंढ़ें खुशी, मिलेगी तरक्की
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 06 Mar 2017 01:39 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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‘एक उद्यमी की जिंदगी ऐसी होती है कि एक जीवन में ही सातो जमभन जी लो। बस आपका काम आपके लिए आंनद देने वाला होना चाहिए।’ यह बातें संयुक्त राष्ट्रसंघ के पूर्व उपनिदेशक प्रोफेसर किशोर मध्यान ने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में रविवार को संपन्न इंटरप्रिन्योरशिप समिट में कही।
टेकभनोक्र्रेट्स को स्टार्ट अप के लिए प्रेरित करते हुए प्रोफेसर मध्यान ने कहा कि आरामदेय जिंदगी की जगह खूबसूरत जिंदगी को चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कामयाब होने के लिए कभी-कभी जोखिम लेना पड़ सकता है। इससे पीछे नहीं हटना चाहिए। माइक्रो साफ्ट इंडिया के पूर्व निदेशक अमाजीत गुप्ता ने कहा कि कोई भी काम शुरू करने से पहले परिस्थितियों और लक्ष्य का ज्ञान होना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुभव भी साझ किए। कार्यक्रम को सलील अग्रवाल आदि ने संबोधित किया। समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिए गए।
इलाहाबाद। अमेरिका में 10 दिनों के भीतर तीन भारतीयों की हत्या से शहरियों में नाराजगी है। इस तरह की घटनाओं से नाराज युवाओं ने पूर्वांचल छठ पूजा समिति के बैनर तले रविवार को बालसन चौराहा पर प्रदर्शन किया और कैंडल मार्च निकाला। समिति के अध्यक्ष अजय राय का कहना था कि इन घटनाओं से लोग दहशत में हैं। इस तरह की नफरत बर्दासत नहीं की जा सकती। भारत सरकार को इसके खिलाफ दबाव बनाना चाहिए। मार्च में हिमांशु दुबे, संदीप मिश्रा, सुरेश यादव, नितिन सिंह, ओम मिश्रा, अभि मिश्रा आदि शामिल रहे।
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दिशा छात्र संगठन की ओर से चलाए जा रहे साप्ताहिक अध्ययन चक्र के अंतर्गत रविवार को ‘फासीवाद क्या है और इससे कैसे लडे़ं’ विषय पर चर्चा हुई। विवेक का कहना था कि वैश्विक पैमाने पर बढ़ता आर्थिक संकट एक तरफ जहां आम जनता को महंगाई, बेरोजगारी जैसी समस्याओं के गर्त में धकेल रहा है, वहीं यह फासीवाद के उभार के लिए जमीन तैयार करने का भी काम कर रहा है। वक्ताओं ने इटली, जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि बदले हुए समय में फासीवाद की कार्यप्रणाली में बदलाव भले ही आए हों लेकिन बुनियादी कारक आज भी वही हैं। अंजलि ने कहा कि विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। तर्क और विज्ञान की बात करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। अंजलि ने कहा कि फासीवाद के खिलाफ जनता के बीच प्रचार अभियान चलाने और सड़कों पर उतरकर मुकाबला करने की जरूरत है। कार्यक्रम में राजू, प्राची, प्रसेन, अमित, नीशू, महाप्रसाद, रश्मि, शिवानी, रीतिका आदि मौजूद रहीं।
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टेकभनोक्र्रेट्स को स्टार्ट अप के लिए प्रेरित करते हुए प्रोफेसर मध्यान ने कहा कि आरामदेय जिंदगी की जगह खूबसूरत जिंदगी को चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कामयाब होने के लिए कभी-कभी जोखिम लेना पड़ सकता है। इससे पीछे नहीं हटना चाहिए। माइक्रो साफ्ट इंडिया के पूर्व निदेशक अमाजीत गुप्ता ने कहा कि कोई भी काम शुरू करने से पहले परिस्थितियों और लक्ष्य का ज्ञान होना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुभव भी साझ किए। कार्यक्रम को सलील अग्रवाल आदि ने संबोधित किया। समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिए गए।
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इलाहाबाद। अमेरिका में 10 दिनों के भीतर तीन भारतीयों की हत्या से शहरियों में नाराजगी है। इस तरह की घटनाओं से नाराज युवाओं ने पूर्वांचल छठ पूजा समिति के बैनर तले रविवार को बालसन चौराहा पर प्रदर्शन किया और कैंडल मार्च निकाला। समिति के अध्यक्ष अजय राय का कहना था कि इन घटनाओं से लोग दहशत में हैं। इस तरह की नफरत बर्दासत नहीं की जा सकती। भारत सरकार को इसके खिलाफ दबाव बनाना चाहिए। मार्च में हिमांशु दुबे, संदीप मिश्रा, सुरेश यादव, नितिन सिंह, ओम मिश्रा, अभि मिश्रा आदि शामिल रहे।
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दिशा छात्र संगठन की ओर से चलाए जा रहे साप्ताहिक अध्ययन चक्र के अंतर्गत रविवार को ‘फासीवाद क्या है और इससे कैसे लडे़ं’ विषय पर चर्चा हुई। विवेक का कहना था कि वैश्विक पैमाने पर बढ़ता आर्थिक संकट एक तरफ जहां आम जनता को महंगाई, बेरोजगारी जैसी समस्याओं के गर्त में धकेल रहा है, वहीं यह फासीवाद के उभार के लिए जमीन तैयार करने का भी काम कर रहा है। वक्ताओं ने इटली, जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि बदले हुए समय में फासीवाद की कार्यप्रणाली में बदलाव भले ही आए हों लेकिन बुनियादी कारक आज भी वही हैं। अंजलि ने कहा कि विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। तर्क और विज्ञान की बात करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। अंजलि ने कहा कि फासीवाद के खिलाफ जनता के बीच प्रचार अभियान चलाने और सड़कों पर उतरकर मुकाबला करने की जरूरत है। कार्यक्रम में राजू, प्राची, प्रसेन, अमित, नीशू, महाप्रसाद, रश्मि, शिवानी, रीतिका आदि मौजूद रहीं।