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बारा में व्यक्ति की संदिग्ध मौत पर भारी बवाल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 21 Aug 2017 01:48 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बारा के असरवई गांव में अशोक कुमार (40 ) की संदिग्ध मौत के बाद ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा। करीब दो घंटे तक आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने का घिराव और सड़क जाम करने से अफरा तफरी मच गई। लोगों के विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एसआरएन अस्पताल भेज दिया । मौके पर पहुंचे एसपी यमुनापार, एसडीएम और सीओ की ओर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही आक्रोशित ग्रामीणों ने जाम खोला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। बिसरा सुरक्षित कर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। जिसके आधार पर इस पुलिस की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
असरवई गांव का अशोक कुमार (40) पुत्र रामसजीवन की मौत शनिवार की देर रात हो गई। मृतक के पुत्र शिव कुमार का कहना है कि शनिवार को पिता अशोक कुमार अपने चार साथियों के साथ मछली मारने निकले थे। वह रात करीब दस बजे मछली मारकर घर आए। उन्होंने बताया कि उनको जालिम, रोहतम, व विजय ने चार कुल्लड़ शराब के बनाए। उनमें से एक कुल्लड़ मेरे पिता अशोक कुमार को पिला दिया। शेष तीन कुल्लड़ नहर में गिरा दिए। कच्ची शराब पीने से उनके पेट में दर्ज होने लगा। उसी समय मां दिलारू देवी ने पिता की मालिश की लेकिन आराम मिलने के स्थान पर शरीर ऐंठने लगा। झटके लगे और सीने का दर्द बढ़ गया और मुंह से झाग भी निकलने लगे। कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। अशोक की मौत के बाद पत्नी औैर बच्चों का रो रो कर बरा हाल हो गया। पूरे गांव में मातम छा गया। थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित परिवार के लोगों ने इस तरह का बयान आबकारी अधिकारी तथा प्रशासनिक अधिकारियों को दिया है। उसे भी शामिल करके जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की वजह साफ नहीं है, इसलिए बिसरा की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
बारा। इलाके में कच्च्ची शराब के अवैध कारोबार ने कुटीर उद्योग का रूप ले लिया है। जिसको बंद कराना अब पुलिस के लिए चुनौती बन है। जबकि लोगों का कहना है कि अवैध शराब बनाने के ठिकानों को क्षेत्रीय पुलिस बखूबी जानती है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नही होने से शराब माफिया के हौसले बुलंद हैं। बारा के चामू सोतापार मेे पिछलेे दिन ये जो घटना हुई है। इस इलाके को कच्ची शराब बनाने का गढ़ माना जाता है। पिछले दो साल पहले जानकारी होने पर बारा पुलिस चामू सोतापार में कच्ची शराब के ठिकानों पर छापा मारने गई थी।
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जहां पर शराब माफिया के आगे पुलिस को झुकना पड़ा था। पुलिस की पूरी टीम को बिना कार्रवाई के बैरंग लौटना पड़ा था। आये दिन इसके सेवन से लोग बीमार पड़ जाते है और मौत हो जाती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लालापुर इलाके में पिछले एक वर्ष के भीतर दो लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके इलाकाई पुलिस कार्यवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति तक ही सीमित है। इलाके में बवंधर, सुंदरपुर, असरवई, छीड़ी, छतहरा, चिल्ला गौहानी, बघला की पहाड़ी, सोनर्षा, आदि जगहों पर कच्च्ची शराब बनाने का कारोबार चलता है। सीओ बारा रत्नेश्श्वर सिंह का कहना है कि जल्द ही सघन अभियान चलाकर अवैध शराब के ब्यवसाय को बंद कराया जायेगा।
घटना के बाद रविवारको ग्रामीणों का आक्रोश देख कर पुलिस व प्रशासन सकते में आ गया। आनन फानन में एसडीएम बारा अर्पित गुप्त, सीओ बारा रत्नेश्वर सिंह ने आबकारी विभाग के एक्साइज इंस्पेक्टर रोहन कुमार के साथ क्षेत्र के असरवई, चामू सोतापार, गींज, ललई आदि गांवों का निरीक्षण किया। जिससे शराब माफियाओं में हड़कंप मचा रहा।
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असरवई गांव का अशोक कुमार (40) पुत्र रामसजीवन की मौत शनिवार की देर रात हो गई। मृतक के पुत्र शिव कुमार का कहना है कि शनिवार को पिता अशोक कुमार अपने चार साथियों के साथ मछली मारने निकले थे। वह रात करीब दस बजे मछली मारकर घर आए। उन्होंने बताया कि उनको जालिम, रोहतम, व विजय ने चार कुल्लड़ शराब के बनाए। उनमें से एक कुल्लड़ मेरे पिता अशोक कुमार को पिला दिया। शेष तीन कुल्लड़ नहर में गिरा दिए। कच्ची शराब पीने से उनके पेट में दर्ज होने लगा। उसी समय मां दिलारू देवी ने पिता की मालिश की लेकिन आराम मिलने के स्थान पर शरीर ऐंठने लगा। झटके लगे और सीने का दर्द बढ़ गया और मुंह से झाग भी निकलने लगे। कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। अशोक की मौत के बाद पत्नी औैर बच्चों का रो रो कर बरा हाल हो गया। पूरे गांव में मातम छा गया। थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित परिवार के लोगों ने इस तरह का बयान आबकारी अधिकारी तथा प्रशासनिक अधिकारियों को दिया है। उसे भी शामिल करके जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की वजह साफ नहीं है, इसलिए बिसरा की रिपोर्ट आने का इंतजार है।
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बारा। इलाके में कच्च्ची शराब के अवैध कारोबार ने कुटीर उद्योग का रूप ले लिया है। जिसको बंद कराना अब पुलिस के लिए चुनौती बन है। जबकि लोगों का कहना है कि अवैध शराब बनाने के ठिकानों को क्षेत्रीय पुलिस बखूबी जानती है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नही होने से शराब माफिया के हौसले बुलंद हैं। बारा के चामू सोतापार मेे पिछलेे दिन ये जो घटना हुई है। इस इलाके को कच्ची शराब बनाने का गढ़ माना जाता है। पिछले दो साल पहले जानकारी होने पर बारा पुलिस चामू सोतापार में कच्ची शराब के ठिकानों पर छापा मारने गई थी।
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जहां पर शराब माफिया के आगे पुलिस को झुकना पड़ा था। पुलिस की पूरी टीम को बिना कार्रवाई के बैरंग लौटना पड़ा था। आये दिन इसके सेवन से लोग बीमार पड़ जाते है और मौत हो जाती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लालापुर इलाके में पिछले एक वर्ष के भीतर दो लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके इलाकाई पुलिस कार्यवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति तक ही सीमित है। इलाके में बवंधर, सुंदरपुर, असरवई, छीड़ी, छतहरा, चिल्ला गौहानी, बघला की पहाड़ी, सोनर्षा, आदि जगहों पर कच्च्ची शराब बनाने का कारोबार चलता है। सीओ बारा रत्नेश्श्वर सिंह का कहना है कि जल्द ही सघन अभियान चलाकर अवैध शराब के ब्यवसाय को बंद कराया जायेगा।
घटना के बाद रविवारको ग्रामीणों का आक्रोश देख कर पुलिस व प्रशासन सकते में आ गया। आनन फानन में एसडीएम बारा अर्पित गुप्त, सीओ बारा रत्नेश्वर सिंह ने आबकारी विभाग के एक्साइज इंस्पेक्टर रोहन कुमार के साथ क्षेत्र के असरवई, चामू सोतापार, गींज, ललई आदि गांवों का निरीक्षण किया। जिससे शराब माफियाओं में हड़कंप मचा रहा।