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मेले में ठंड से किसान की मौत पर बवाल
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sat, 16 Jan 2016 11:59 PM IST
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माघ मेला क्षेत्र में शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के कैम्प में ठंड लग जाने से एक किसान की मौत हो गई। काफी देर तक मौके पर कोई अफसर नहीं पहुंचा तो किसानों ने बवाल शुरू कर दिया और लाल सड़क पर किसान का शव रखकर जाम लगा दिया। एक घंटे तक चले जाम के बाद किसानों ने डीएम दफ्तर पर शव रखकर धरना देने का निर्णय लिया। बढ़ता देख प्रशासन के कई अफसर मौके पर पहुंच गए। डीएम संजय कुमार शहर से बाहर थे, सो कमिश्नर राजन शुक्ला ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए मृत किसान के परिजनों को मौके पर ही डेढ़ लाख रुपये मुआवजा दिलवाया, जिसके बाद बवाल शांत हुआ। बवाल तो थम गया लेकिन किसान मुआवजे की रकम से संतुष्ट नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन (टिकैट गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैट ने कम से कम सात लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग की है। उनका आरोप है कि मेला में अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई और अव्यवस्था भी हावी है। इसी वजह से किसान को ठंड लगी और उसी मौत हो गई।
राजस्थान में भरतपुर जिले के चैनपुर गांव निवासी अमर सिंह पुत्र गंगी (70) यहां गंगा स्नान के लिए यहां आए थे। परेड मैदान पर किसान यूनियन की ओर से लगाए गए शिविर में ठहरे हुए थे। शनिवार की सुबह अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। वहां मौजूद अन्य किसानों ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल की स्थापना हो चुकी है और वहां चिकित्सकों की ड्यूटी भी लगा दी गई है लेकिन मौके पर डॉक्टरों ने पहुंचने में देर कर दी जबकि फासला एक किलोमीटर का भी नहीं था। चिकित्सकों की टीम जब मौके पर पहुंची तो अमर सिंह की सांस थम चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। साथी की मौत की खबर सुनकर मौके पर सैकड़ों की संख्या में किसान इकट्ठा हो गए। काफी देर रात कोई अफसर मौके पर नहीं पहुंचा तो किसानोें ने लाल सड़क पर अमर सिंह का शव रखकर चक्काजाम कर दिया। पुलिस ने हटाने की कोशिश की तो धक्कामुक्की शुरू हो गई।
बवाल बढ़ने लगा और किसानों ने डीएम दफ्तर जाकर धरना देने का निर्णय लिया। डीएम शहर से बाहर थे। उनकी जगह प्रभारी डीएम एवं सीडीओ अटल कुमार राय जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उधर, बवाल की सूचना कमिश्नर तक पहुंची तो उन्होंने तत्काल प्रभारी डीएम से संपर्क किया और मौके पर जाकर डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने को कहा। उनके निर्देश पर मुआवजा दिया गया तो किसानों ने जाम हटाया। अफसरों ने किसानों को यह आश्वासन भी दिया कि इस बाबत राजस्थान सरकार से पत्राचार किया जाएगा ताकि पीड़ित परिवार को और मुआवजा मिले सके। यूनियन के सदस्य सात लाख रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यूनियन के जिलाध्यक्ष शालिक राम यादव का आरोप है कि मेले में अव्यवस्था और अलाव न जलाए जाने से किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से अमर सिंह को ठंड लगी और उनकी मौत2 हो गई।
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राजस्थान में भरतपुर जिले के चैनपुर गांव निवासी अमर सिंह पुत्र गंगी (70) यहां गंगा स्नान के लिए यहां आए थे। परेड मैदान पर किसान यूनियन की ओर से लगाए गए शिविर में ठहरे हुए थे। शनिवार की सुबह अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। वहां मौजूद अन्य किसानों ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी। मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल की स्थापना हो चुकी है और वहां चिकित्सकों की ड्यूटी भी लगा दी गई है लेकिन मौके पर डॉक्टरों ने पहुंचने में देर कर दी जबकि फासला एक किलोमीटर का भी नहीं था। चिकित्सकों की टीम जब मौके पर पहुंची तो अमर सिंह की सांस थम चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। साथी की मौत की खबर सुनकर मौके पर सैकड़ों की संख्या में किसान इकट्ठा हो गए। काफी देर रात कोई अफसर मौके पर नहीं पहुंचा तो किसानोें ने लाल सड़क पर अमर सिंह का शव रखकर चक्काजाम कर दिया। पुलिस ने हटाने की कोशिश की तो धक्कामुक्की शुरू हो गई।
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बवाल बढ़ने लगा और किसानों ने डीएम दफ्तर जाकर धरना देने का निर्णय लिया। डीएम शहर से बाहर थे। उनकी जगह प्रभारी डीएम एवं सीडीओ अटल कुमार राय जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उधर, बवाल की सूचना कमिश्नर तक पहुंची तो उन्होंने तत्काल प्रभारी डीएम से संपर्क किया और मौके पर जाकर डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने को कहा। उनके निर्देश पर मुआवजा दिया गया तो किसानों ने जाम हटाया। अफसरों ने किसानों को यह आश्वासन भी दिया कि इस बाबत राजस्थान सरकार से पत्राचार किया जाएगा ताकि पीड़ित परिवार को और मुआवजा मिले सके। यूनियन के सदस्य सात लाख रुपये मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यूनियन के जिलाध्यक्ष शालिक राम यादव का आरोप है कि मेले में अव्यवस्था और अलाव न जलाए जाने से किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से अमर सिंह को ठंड लगी और उनकी मौत2 हो गई।
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