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भर्ती परीक्षा पास कराने वाले के तार जुड़े व्यापम घोटाले से
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 25 Dec 2017 01:43 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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दरोगा भर्ती समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं पास कराने का ठेका लेने वाले गिरोह के सरगना ने पकड़े जाने के बाद पुलिस के सामने तमाम बड़े खुलासे किए हैं। गाजीपुर के रहने वाले अवधेश कुमार भारती ने पुलिस के सामने कबूला है कि वह मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापम भर्ती घोटाले में भी शामिल रहा है। अवधेश एमबीबीएस दूसरे वर्ष में ही भोपाल के मेडिकल कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था। वह अभ्यर्थी के मिलते-जुलते चेहरे वाले छात्र को फर्जी प्रवेश पत्र के जरिए परीक्षा देने के लिए बैठाता था। इस फर्जीवाड़ा से उसने लाखों रुपये की कमाई कर डाली। गोरखपुर पुलिस उसकी तलाश में लगी थी, इसी दौरान उसकी लोकेशन इलाहाबाद में मिली। जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने उसे दो अन्य साथियों संग कैंट इलाके से पकड़ लिया।
20 दिसंबर को गोरखपुर के बेलीपार इलाके में दरोगा भर्ती परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी रमेश प्रसाद की जगह अभिषेक रंजन उर्फ रवि रंजन परीक्षा देते पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने कुबूला कि वह परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के लिए पेपर साल्वर का काम करता है। उसने ही पुलिस को बताया कि गिरोह का सरगना गाजीपुर में नोनहरा इलाके के सुमुंडी गांव का अवधेश कुमार भारती है। गोरखपुर पुलिस ने अवधेश के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगाया तो उसकी लोकेशन इलाहाबाद में मिली। इसके बाद इलाहाबाद एसएसपी से संपर्क किया गया तो क्राइम ब्रांच ने यहां अवधेश और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू कर दी। शनिवार देर रात कैंट इलाके में टीवी टावर के पास अवधेश को उसके साथियों औरंगाबाद बिहार के सुधीर कुमार सिंह तथा मुंगेर जनपद बिहार के आनंद गौरव समेत दबोच लिया।
पूछताछ में पता चला कि मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले में भूमिका के चलते अवधेश कुमार को भोपाल के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस दूसरे साल में निष्कासित किया गया था। निष्कासन के बावजूद वह खुद को डॉक्टर बताकर अपने नाम के आगे भी डॉ ही लिखता रहा। यूपी लौटकर वह यहां भर्ती परीक्षाएं पास कराने का रैकेट चलाने लगा। उसने दरोगा समेत तमाम सरकारी नौकरियों की भर्ती में खेल किया। वह परीक्षा पास कराने के लिए छह लाख में ठेका लेता था। 50 हजार रुपये एडवांस लेने के बाद वह अभ्यर्थी की जगह उसके ही हुलिए के सॉल्वर को फर्जी आईडी के जरिए परीक्षा केंद्र में बैठा देता था। गिरफ्तार अवधेश और उसके साथियों के कब्जे से 80 हजार रुपये, पांच मोबाइल फोन, विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और सादे पेपर, एक दर्जन से ज्यादा से ज्यादा एटीएम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड. वोटर आईडी और ड्राइवर लाइसेंस, सर्किल आकार में उत्तर प्रदेश के 13 फर्जी हालमार्क भी बरामद हुए।
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क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अविवाहित अवधेश फर्जीवाड़े से कमाए पैसों से खूब अय्याशी कर रहा था। इलाहाबाद में उसने राजापुर समेत तीन जगह किराए पर फ्लैट ले रखे थे। वह सुबह से ही महंगी शराब पीने लगता और ओला की कार में घूमता रहता था। इतना ही नहीं, वह सेक्स रैकेट के कई लोगों से संपर्क में था। रोज वह हजारों रुपये वह कार में घूमने, महंगी शराब तथा लड़कियों पर ही फूंकता था। मंहगे मोबाइल और ब्रांडेड जूतों, चश्मे, घड़ियों, कपड़ों पर भी पैसे उड़ाता रहा।
जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि गिरोह के सरगना अवधेश के तार मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से भी जुड़े हैं। वह मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में ठहरता रहा है। जांच की जा रही है कि मेडिकल कॉलेज में कौन लोग उसके संपर्क में थे? ऐसा तो नहीं कि एमबीबीएस के छात्र उसके लिए साल्वर का काम करते हों। पिछले दिनों ऐसे ही एक रैकेट में मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज के कई बीटेक छात्रों के शामिल होने का खुलासा हो चुका है।
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20 दिसंबर को गोरखपुर के बेलीपार इलाके में दरोगा भर्ती परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी रमेश प्रसाद की जगह अभिषेक रंजन उर्फ रवि रंजन परीक्षा देते पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने कुबूला कि वह परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के लिए पेपर साल्वर का काम करता है। उसने ही पुलिस को बताया कि गिरोह का सरगना गाजीपुर में नोनहरा इलाके के सुमुंडी गांव का अवधेश कुमार भारती है। गोरखपुर पुलिस ने अवधेश के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगाया तो उसकी लोकेशन इलाहाबाद में मिली। इसके बाद इलाहाबाद एसएसपी से संपर्क किया गया तो क्राइम ब्रांच ने यहां अवधेश और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू कर दी। शनिवार देर रात कैंट इलाके में टीवी टावर के पास अवधेश को उसके साथियों औरंगाबाद बिहार के सुधीर कुमार सिंह तथा मुंगेर जनपद बिहार के आनंद गौरव समेत दबोच लिया।
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पूछताछ में पता चला कि मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले में भूमिका के चलते अवधेश कुमार को भोपाल के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस दूसरे साल में निष्कासित किया गया था। निष्कासन के बावजूद वह खुद को डॉक्टर बताकर अपने नाम के आगे भी डॉ ही लिखता रहा। यूपी लौटकर वह यहां भर्ती परीक्षाएं पास कराने का रैकेट चलाने लगा। उसने दरोगा समेत तमाम सरकारी नौकरियों की भर्ती में खेल किया। वह परीक्षा पास कराने के लिए छह लाख में ठेका लेता था। 50 हजार रुपये एडवांस लेने के बाद वह अभ्यर्थी की जगह उसके ही हुलिए के सॉल्वर को फर्जी आईडी के जरिए परीक्षा केंद्र में बैठा देता था। गिरफ्तार अवधेश और उसके साथियों के कब्जे से 80 हजार रुपये, पांच मोबाइल फोन, विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और सादे पेपर, एक दर्जन से ज्यादा से ज्यादा एटीएम कार्ड, फर्जी आधार कार्ड. वोटर आईडी और ड्राइवर लाइसेंस, सर्किल आकार में उत्तर प्रदेश के 13 फर्जी हालमार्क भी बरामद हुए।
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क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अविवाहित अवधेश फर्जीवाड़े से कमाए पैसों से खूब अय्याशी कर रहा था। इलाहाबाद में उसने राजापुर समेत तीन जगह किराए पर फ्लैट ले रखे थे। वह सुबह से ही महंगी शराब पीने लगता और ओला की कार में घूमता रहता था। इतना ही नहीं, वह सेक्स रैकेट के कई लोगों से संपर्क में था। रोज वह हजारों रुपये वह कार में घूमने, महंगी शराब तथा लड़कियों पर ही फूंकता था। मंहगे मोबाइल और ब्रांडेड जूतों, चश्मे, घड़ियों, कपड़ों पर भी पैसे उड़ाता रहा।
जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि गिरोह के सरगना अवधेश के तार मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से भी जुड़े हैं। वह मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में ठहरता रहा है। जांच की जा रही है कि मेडिकल कॉलेज में कौन लोग उसके संपर्क में थे? ऐसा तो नहीं कि एमबीबीएस के छात्र उसके लिए साल्वर का काम करते हों। पिछले दिनों ऐसे ही एक रैकेट में मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज के कई बीटेक छात्रों के शामिल होने का खुलासा हो चुका है।