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मीरगंज से रेड लाइट एरिया शिफ्ट करे प्रशासन: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Thu, 14 Jan 2016 01:25 AM IST
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शहर की घनी आबादी वाले मोहल्ले मीरगंज में दशकों पुराने रेड लाइट एरिया को वहां से हटाने के लिए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को वैकल्पिक स्थान बताने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि रेड लाइट एरिया ऐसे स्थान पर जहां आजादी के पहले से संचालित शिक्षण संस्था है जिसमें दो हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। वाराणसी में प्रशासन ऐसा प्रयोग कर चुका है। अधिवक्ता सुनील कुमार चौधरी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि जिलाधिकारी को इस मामले में वास्तविक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, डीएम इस मामले में अपनी आंख बंद नहीं कर सकते हैं।
पीठ ने जिला प्रशासन के हलफनामे को अस्वीकार करते हुए कहा कि प्रशासन इस बात से पूरी तरह से इंकार नहीं कर रहा है कि क्षेत्र में देहव्यापार नहीं होता है। वाराणसी में घनी आबादी वाले क्षेत्र से रेड लाइट एरिया हटाने का कार्य किया गया है। इलाहाबाद प्रशासन को भी ऐसा करना चाहिए।
याची सुनील चौधरी ने कहा कि प्रशासन ने स्वयं अपने हलफनामे और आरटीआई में मांगी गई जानकारी में कहा है कि वह देह व्यापार के अड्डों पर रेड डालने की कार्रवाई समय-समय पर करते हैं। प्रशासन ने यह भी माना है कि नाबालिग लड़कियोें को बेचे जाने की जानकारी पर कार्रवाई की गई है और कई बार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस चौकी पर भी लिखा गया है कि फौजियों और बच्चों का रेड लाइट एरिया में प्रवेश वर्जित है। जबकि रेड लाइट एरिया से महज सौ मीटर की दूरी पर पुराना स्कूल है।
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यहां पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जन्म स्थली भी रही है इसलिए इस क्षेत्र को मुक्त कराना आवश्यक है। कोर्ट ने कमिश्नर और डीएम को निर्देश दिया है कि वह 30 मार्च तक वैकल्पिक स्थान की तलाश कर कोर्ट को अवगत कराएं।
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पीठ ने जिला प्रशासन के हलफनामे को अस्वीकार करते हुए कहा कि प्रशासन इस बात से पूरी तरह से इंकार नहीं कर रहा है कि क्षेत्र में देहव्यापार नहीं होता है। वाराणसी में घनी आबादी वाले क्षेत्र से रेड लाइट एरिया हटाने का कार्य किया गया है। इलाहाबाद प्रशासन को भी ऐसा करना चाहिए।
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याची सुनील चौधरी ने कहा कि प्रशासन ने स्वयं अपने हलफनामे और आरटीआई में मांगी गई जानकारी में कहा है कि वह देह व्यापार के अड्डों पर रेड डालने की कार्रवाई समय-समय पर करते हैं। प्रशासन ने यह भी माना है कि नाबालिग लड़कियोें को बेचे जाने की जानकारी पर कार्रवाई की गई है और कई बार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस चौकी पर भी लिखा गया है कि फौजियों और बच्चों का रेड लाइट एरिया में प्रवेश वर्जित है। जबकि रेड लाइट एरिया से महज सौ मीटर की दूरी पर पुराना स्कूल है।
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यहां पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जन्म स्थली भी रही है इसलिए इस क्षेत्र को मुक्त कराना आवश्यक है। कोर्ट ने कमिश्नर और डीएम को निर्देश दिया है कि वह 30 मार्च तक वैकल्पिक स्थान की तलाश कर कोर्ट को अवगत कराएं।