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अपहरण हत्या के आरापियों की फांसी रद्द

Fri, 22 Jun 2018 01:44 AM IST
Updated Fri, 22 Jun 2018 01:44 AM IST
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अपहरण हत्या के आरापियों की फांसी रद्द
सभी केंद्र- मेरठ के ध्यानार्थ
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अपहरण, हत्या के आरोपियों की फांसी की सजा रद्द
0 हाईकोर्ट ने फिरौती के लिए की गई हत्या के दो आरोपियों को बरी किया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर में आठ वर्ष पूर्व हुई युवक के अपहरण और हत्या की घटना में सुनाई गई फांसी की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने फांसी की सजा पाए दोनों अभियुक्तों चंद्रप्रकाश उर्फ मोनू और नीतू को, यदि वह किसी दूसरे अपराध में वांछित नहीं हैं तो रिहा करने का आदेश दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुजफ्फरनगर के फैसले के खिलाफ अभियुक्तों की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति वीके नारायण और न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता की खंडपीठ ने दिया है।
अपीलार्थी मोनू और नीतू की ओर से अधिवक्ता रौनक चतुर्वेदी ने पक्ष रखा। दोनों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुजफ्फनगर ने अरशद के अपहरण और हत्या के जुर्म में 28 मार्च 2017 को फांसी और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इन दोनों के कब्जे से मृतक का मोबाइल और निशानदेही पर उसका शव बरामद किया गया था। सजा की वैधानिकता को चुनौती देते हुए अधिवक्ता रौनक ने अभियोजन की ओर से पेश किए साक्ष्यों पर सवाल उठाए।
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बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन ने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया, जिससे साबित हो सके कि शव की बरामदगी अभियुक्त की निशानदेही पर ही की गई है। मृतक के जिस मोबाइल फोन की बरामदगी मोनू के कब्जे से की गई है, उसी फोन से फिरौती की कॉल की गई। अभियोजन ने कोई कॉल डिटेल प्रस्तुत नहीं की है, जिससे साबित हो सके कि कॉल करने में किस मोबाइल का प्रयोग हुआ है। फोन से मिले सिम कार्ड से भी बरामदगी संदिग्ध है। मोबाइल के सिम कार्ड और आईईएमआई नंबर को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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अधिवक्ता का कहना था कि अपराध न्यायशास्त्र का यह मौलिक सिद्धांत है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से यह निसंदेह रूप से साबित होना चाहिए कि सिर्फ और सिर्फ अभियुक्त ने ही अपराध किया है। जबकि इस मामले में अभियोजन संदेह से परे ऐसा साबित करने में नाकाम रहा है। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन उन परिस्थितियों और साक्ष्यों को साबित करने में नाकाम रहा है, जिससे यह संदेह से परे साबित हो सके कि अपहरण और हत्या अभियुक्तों ने ही की है।


गलत साबित हुई हत्या की कहानी
घटना तीन अक्तूबर 2010 की है। वादी मुकदमा राशिद का बेटा अरशद शाहपुर मोड़ पर स्थित अपनी दुकान पर बैठा था तभी उसके मोबाइल पर कॉल आई। किसी ने उसे कुछ समान खरीदने के लिए बुलाया। अरशद फोन करने वाले से मिलने के लिए अपनी बाइक से निकला और फिर वापस नहीं लौटा। कुछ देर बाद अरशद के ही मोबाइल से किसी ने फोन कर सूचना दी कि अरशद का अपहरण हो गया है। घर वालों ने फरमान और उसके रिश्तेदारों आशू तथा बूटा के खिलाफ अपहरण और फिरौती मांगने का मुकदमा दर्ज कराया। तीसरे दिन पुलिस ने तीन युवकों मोनू, जितेंद्र तथा नीतू को अपहरण और हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से अरशद का काले रंग का मोबाइल फोन बरामद किया गया तथा अभियुक्तों की निशादेही पर एक खेत से अरशद का शव और पास से ही एक पिस्टल की बरामदगी दिखाई गई। पुलिस ने दावा किया कि अभियुक्तों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
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