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उपभोक्ता फोरम : गाड़ी चोरी की फर्जी कहानी गढ़ दावा भुगतान की मांग करना पड़ा भारी

Wed, 17 Aug 2022 11:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 17 Aug 2022 11:18 PM IST
सार

मोहन यादव ने अपनी गाड़ी की चोरी होने का दावा करके बीमा कंपनी के समक्ष बीमा की रकम भुगतान किए जाने के लिए क्लेम प्रस्तुत किया जिसे, बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया। इसके विरुद्ध स्थाई लोक अदालत के समक्ष बीमा कंपनी के विरुद्ध मुकदमा प्रस्तुत किया था।

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Consumer Forum Fake story of car theft, demand for payment of stronghold claim was heavy
कोर्ट, कंज्यूमर फोरम - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

गाड़ी चोरी होने की कहानी गढ़ कर दावा भुगतान की मांग करना याची के लिए भारी पड़ गया, स्थायी लोक अदालत ने मामले को झूठा मानते हुए याची के दावा वाद को खारिज कर दिया। स्थायी लोक अदालत ने कहा कि वाद विपक्षी बीमा कंपनी के विरुद्ध पोषणीय नही है। लिहाजा, निरस्त किए जाने के योग्य है, दोनों पक्ष अपना.अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे। यह आदेश स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष आरएन पांडेय ने शिवकुटी थाना के रसूलाबाद निवासी मोहन यादव की ओर से पेश मुकदमे की सुनवाई के बाद दिया।

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मोहन यादव ने अपनी गाड़ी की चोरी होने का दावा करके बीमा कंपनी के समक्ष बीमा की रकम भुगतान किए जाने के लिए क्लेम प्रस्तुत किया जिसे, बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया। इसके विरुद्ध स्थाई लोक अदालत के समक्ष बीमा कंपनी के विरुद्ध मुकदमा प्रस्तुत किया था। मोहन यादव ने शिवकुटी थाने में अपनी गाड़ी चोरी होने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसकी गाड़ी उसके दरवाजे से 31 अगस्त 2017 को चोरी हो गईए उसने गाड़ी खो जाने की सूचना इंश्योरेंस कंपनी को दी लेकिन इंश्योरेंस कंपनी ने दावे का भुगतान नहीं किया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याची ने अपनी गाड़ी को अपने यहां यदाकदा गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर को फैजाबाद जाने को दिया था। वहां से वह गाड़ी चोरी हो गई। 
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मामले में प्राथमिकी आईपीसी की धारा 406 के तहत दर्ज की गई थी, जांच के दौरान उसने दूसरी कहानी बनाई और गाड़ी को अपने दरवाजे से चोरी होना बताया और इस आधार पर छह लाख, 94 हजारए 148 रुपये का दावा इंश्योरेंस कंपनी पर ठोका। कंपनी ने कहा कि गाड़ी चोरी हुई ही नही। इसलिए दावा वाद पोषणीय नही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याची प्राथमिकी सही सूचना के आधार पर दर्ज कराई, लेकिन विवेचना में एक नई कहानी गढ़ी। कोर्ट ने कहा कि दावा गलत आधारों पर किया गया है इसलिए यह निरस्त किए जाने योग्य है।

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