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इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का रास्ता साफ
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Updated Sun, 02 Dec 2018 01:34 AM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा विज्ञापित प्रधानाध्यापकों के 904 पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने पूर्व में इन नियुक्तियों पर लगाई रोक हटा ली है। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर परिणाम जारी किया जाए, मगर नियुक्तियां इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।
हरिश्चंद्र दीक्षित एवं अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूूर्ति बी. अमित स्थालकर सुन
वाई कर रहे हैं। अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक इंटर कॉलेजों में प्रधानाध्यापकों के 904 पदों के लिए 27 जून 2011 को विज्ञापन जारी किया गया। चयन प्रक्रिया पूरी कर साक्षात्कार 2015 में पूरा कर लिया गया। इस दौरान कॉलेजों में कार्यरत तदर्थ प्रधानाध्यापकों ने नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। आरोप लगाया गया कि प्रधानाध्यापकों का चयन करने वाले चयन बोर्ड के सदस्य स्वयं इसकी योग्यता नहीं रखते हैं। साक्षात्कार लेने वाले विशेषज्ञ प्रधानाध्यापक के लिए स्वयं अर्ह नहीं थे। हाईकोर्ट ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए चयन परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी। याचिका पर 28 नवंबर 2018 को पुन: सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्थगन आदेश समाप्त करते हुए कहा कि चयन परिणाम जारी किया जाए, मगर इसके तहत की गई नियुक्तियां कोर्ट के निर्णय पर निर्भर करेंगी।
दो सदस्यों को हाईकोर्ट ने अयोग्य करार दिया था
प्रयागराज। प्रधानाध्यापक भर्ती का साक्षात्कार लेने वाले सदस्यों की योग्यता को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बोर्ड के दो सदस्यों अनीता यादव और ललित कुमार के काम करने पर रोक लगा दी थी। दोनों सदस्यों ने इसे सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। मामला अभी भी सुप्रीमकोर्ट में लंबित है।
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हरिश्चंद्र दीक्षित एवं अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूूर्ति बी. अमित स्थालकर सुन
वाई कर रहे हैं। अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक इंटर कॉलेजों में प्रधानाध्यापकों के 904 पदों के लिए 27 जून 2011 को विज्ञापन जारी किया गया। चयन प्रक्रिया पूरी कर साक्षात्कार 2015 में पूरा कर लिया गया। इस दौरान कॉलेजों में कार्यरत तदर्थ प्रधानाध्यापकों ने नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। आरोप लगाया गया कि प्रधानाध्यापकों का चयन करने वाले चयन बोर्ड के सदस्य स्वयं इसकी योग्यता नहीं रखते हैं। साक्षात्कार लेने वाले विशेषज्ञ प्रधानाध्यापक के लिए स्वयं अर्ह नहीं थे। हाईकोर्ट ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए चयन परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी। याचिका पर 28 नवंबर 2018 को पुन: सुनवाई हुई। कोर्ट ने स्थगन आदेश समाप्त करते हुए कहा कि चयन परिणाम जारी किया जाए, मगर इसके तहत की गई नियुक्तियां कोर्ट के निर्णय पर निर्भर करेंगी।
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दो सदस्यों को हाईकोर्ट ने अयोग्य करार दिया था
प्रयागराज। प्रधानाध्यापक भर्ती का साक्षात्कार लेने वाले सदस्यों की योग्यता को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बोर्ड के दो सदस्यों अनीता यादव और ललित कुमार के काम करने पर रोक लगा दी थी। दोनों सदस्यों ने इसे सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। मामला अभी भी सुप्रीमकोर्ट में लंबित है।
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